Essay On Mango Tree in Hindi- आम के पेड़ पर निबंध


Essay On Mango Tree in Hindi


हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में Essay On Mango Tree in Hindi मतलब की आम के पेड़ पर निबंध को पढ़ेगें! आम का पेड़ हम सभी का प्रिय पेड़ होता है! हम सभी लोगो को पका हुआ आम खाने में बहुत मज़ा आता है! आज हम इस post में उस ही आम के पेड़ के बारे में पढ़ेगें! मै उम्मीद करता हू की आपको  Essay On Mango Tree in Hindi पसंद आयेगा! यदि आपको  Mango Essay Tree in Hindi पसंद आये तो इसको दुसरे के साथ शेयर करना ना भूले! 

Essay On Mango Tree in Hindi- आम के पेड़ पर निबंध 


हमारे भारत देश में बहुत ही अलग अलग अलग प्रकार के पेड़ पाये जाते है! आम का पेड़ एक ऐसा पेड़ है जिसको हर एक भारतीय बहुत पसंद करता है! आम के पेड़ को लोग इसलिए पसंद करते है क्योकि आम के पेड़ पर पैदा होने वाला आम बहुत ही मीठा और स्वादिष्ट होता है! भारत में बड़े पैमाने पर आम की खेती की जाती है! भारत में आम के पेड़ अलग अलग राज्य में अलग अलग होते है! आमो के पेड़ो के बहुत सारी प्रजाति होती है! कई आम के पेड़ ऐसे भी होते है जो केवल 5 से 6 साल बाद से फल देने लगते है! इसके साथ साथ आप के कई सारे ऐसे भी प्रजाति भी है जो 15 से 20 साल के बाद से फल देने शुरु करते है! इसलिए कोई शक नहीं है की आम के फल को हम सब बहुत पसंद करते है! लोग आम के फल को फलो का राजा कहते है! 

आम में पेड़ विशाल होते है! एक नार्मल आम का पेड़ 20 फुट से 80 फुट तक हो सकते है! आम के पेड़ पर जो पत्ती पायी जाती है वह भाले की तरह होती है! आम के पेड़ पर जो फल पाये जाते है वह शुरुवात में हरे रंग के होते है लेकिन जैसे जैसे आम का फल पकड़ा जाता है वैसे ऐसे इसके रंग में भी परिवर्तन होने लगता है! जब आम पूरी तरह से पक जाता है तब इसका रंग पिला हो जाता है! जब आम के फल का रंग पिला हो जाये तो इसका मतलब की अब आम  पूरी तरह से पक कर तैयार है! आम के फल में गुथिली भी पायी जाती है! आम को खाने के बाद उस गुथिली को फेक दिया जाता है! अगर आप इसके गुथिली को कही सही जगह पर लगा दे तो उस गुथिली से दूसरा आम का पेड़ निकल जाता है! 

आम के लड़की का उपयोग गावो में कहाँ पकाने के लिए किया जाता है! गावों में बड़े पैमाने पर आम के लकड़ी का उपयोग ईधन के रूप में किया जाता है! आमो के बहुत सारे प्रजातिया होती है!  लँगड़ा, चौसा , दशहरी, बम्बईया आदि उनके कुछ प्रमुख्य प्रजाति है! जहाँ पर पानी का बढ़िया इंतजाम होता है वहां पर आम के पेड़ का विकास अच्छी तरह से होता है! आम के पेड़ में फल साल में केवल एक बार आता है! आम के पेड़ में फल आने से पहले उसमे फूल आते है! फूल आने के एक महीने ले बाद उसमे धीरे धीरे फल आना शुरु होता है! भारत में आम के फल की बहुत मांग रहती है! इसी कारण हर साल भारत में बड़े पैमाने पर आम का फल पैदा होता है! 

 Mango Tree History  in Hindi- आम के पेड़ का इतिहास 


आम के पेड़ का इतिहास के पेड़ का इतिहास बहुत ही पुराना है! प्राचीनकाल से ही हमारे देश में लोग आम का सेवन कर रहे है! आम के बारे में कई सारे शोध किये गए है और उन सभी शोधो के अनुसार आम के पेड़ और उसके प्रजाति की शुरुवात  स्याम और मलाया से हुई थी! भारत में आम के पेड़ और उसके फल के बारे में लोगो को बुद्ध काल में पता चला था! आज से कई सौ साल पहले भारत के लोगो को आम का बगीचा लगाना बहुत पसंद था! और प्राचीनकाल में लोग बड़े फैमाने पर आम के बागीचे लगाते थे! अकबर भी ने अपने शासन काल में बहुत सारे आम के बागीचे लगवाये थे! आम के बारे में भारत में बहुत सी लोकगीत भी गाये जाते है! आम के फल के और भी बहुत सारे उपयोग है! भारत में कच्चे काम के फल का बड़े पैमाने पर अचार और चटनी भी बनायीं जाती है! आज के समय में आपको बाजार में बहुत से तरह के आम एक आचार और चटनी मिल जायेगें! 

प्राचीनकाल के बहुत सारे कवियों ने भी अपने kavita में आम के पेड़ और फल का जिक्र किया है! महान कवि कालिदास ने भी अपनी kavita में आम के फल की तारीफ़ की है! भारत में जितने भी फल पाये जाते है उन सभी फलो में आम का फल सभी का प्रिय फल है! मैंने आपको ऊपर पहले ही बताया है की भारत में बड़े फैमाने पर आम की पैदावार होती है! एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल 1 से 2 करोड़ टन आम की पैदावार होती है! पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा आम की पैदावार भारत में होती है! भारत में बहुत से लोग ऐसे है जिनके आय का मुख्य स्रोत आम का बगीचा ही है! भारत में आपको जगह जगह आम के बगीचे दिखाई देगें! 

आम का पेड़ आर्युर्वैदिक दृष्टी से भी बहुत फायदेमंद होता है! यदि किसी को कोई बिच्छु काट लेता है तो इस स्तिथी में आम के पत्ते को पीसकर लगाने से दर्द में आराम मिलता है! आम के फल में कई तरह के बिटामिन भी पाये जाते है! आम के फल से निकलने वाली गुथिली के द्वारा आप अपने कफ को दूर कर सकते है! इन सभी के अलावा और भी बहुत से फायदे है आम के पेड़ पर आम के फल के! आने वाले समय में आम से होने वाले कुछ बढ़िया और उपयोगी फायदों के बारे में मै एक आर्टिकल लिखकर इस website पर शेयर करूँगा! 

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Tsunami Essay in Hindi – सुनामी पर निबंध

Tsunami Essay in Hindi


हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में Tsunami Essay in Hindi मतलब की सुनामी पर निबंध को पढ़ेगें ! "सुनामी " शब्द को आपने बहुत बार सुना होगा! सुनामी एक बहुत ही भयंकर प्राक्रतिक आपदा है! सुनामी में समुंदर में बहुत ही बड़ी बड़ी लहरे उठती है! और इन लहरों के बीच पड़ने वाले हर एक चीज़ को एक लहरे तबाह कर देती है! दुनिया में बहुत से ऐसे देश है जहाँ पर सुनामी आई हुई है! अगर भारत की बात करे तो भारत देश में २004 में एक बहुत ही भयंकर सुनामी आई थी! इस सुनामी में बहुत ज्यादा लोग मरे गए थे! इसके साथ साथ बहुत ही ज्यादा जन और धन दोनों का नुकसान हुआ था! 2004 में जो सुनामी भारत में आया था वह भारत में आया सबसे भयंकर सुनामी था! 

Tsunami Essay in Hindi – सुनामी पर निबंध


सुनामी एक जापानी शब्द है! सुनामी दो शब्द सु और नामी से मिलकर बना है! सु का अर्थ बन्दरगाह और नामी का अर्थ लहर होता है! कुछ लोग सुनामी लहरों का सम्बन्ध ज्वारीय लहरों से जोड़ते है! लेकिन ये बात भी सही है की सुनामी लहरे ज्वारीय लहरे नहीं होती है! 

सुनामी तरंगो की एक ऐसी श्रखला है जो पानी के अंदर हलचल मचने पर जल स्थाम्भ के विस्थापन से उठती है! इसकी चपेट में निचले तटवर्ती इलाके आ जाते है! ज्वारीय लहरों की भाति सुनामी लहरे भी कभी अकेले नहीं आती है! सुनामी लहरे 5 से 10 मिनट के अन्तराल में एक के बाद एक आकर तबाही मचाती है! अगर बात की जाये खुले और गहरे समुंदर में तो  खुले और गहरे समुंदर में सुनामी लहरे विनाशकारी नहीं होती है! जैसे जैसे ये तटीय एरिया में आती है वैसे वैसे इसका विनाश का रूप बढता जाता है! अब सवाल ये उठता है की आखिर सुनामी लहरे कैसे और किन किन कारण की वजह से उठती है! तो इसके कई कारण है जिनमे से मै आपको कुछ कारण के बारे में बताता हु! 

* जब सागर में उठा पटक की शक्ति जल स्तंभ को उठा देती है! 
* जब समुंदर तल में उठा पटक से ऊपर की हलचल मचती है! 
* जब गुरुत्वाकार्सन प्रभाव से जल में ऊपर से हलचल बढती है! 

जब सुनामी लहरे आती है तो ये इतनी खतरनाक होती है की लोग इसको एक तरह से टाइम बम कहकर पुकारते है! ये सुनामी लहरे गोल तरंगो के रूप में एक के बाद एक जल के स्पर्श बिंदु से निकलकर चारो तरफ प्रसारित होती है! स्पर्श बिंदु से निकलते समय इन तरंगो की मोटाई काफी कम होती है! किन्तु जैसे जैसे ये लहरे किनारे तक जाती है वैसे वैसे इसकी उचाई और मोटाई बढती जाती है! जब समुंदर के किसी एरिया में बहुत शक्तिशाली भूकंप आता है! तो जल के उपरी सतह पर केन्द्रीय बिंदु से कुछ cm लम्बी जल की गोल तरंगे निकलकर आगे प्रसारित होने लगती है! ये तरंगे उत्पति के समय हानिकारण नहीं होती है! लेकिन जैसे जैसे ये छिछले जल वाले तटवर्ती एरिया की तरफ बढती है! वैसे वैसे विनाशक हो जाती है! ये सब कुछ अपने में समेट लेती है! 

सुनामी लहरे जेट बिमान से भी अधिक तेज चलती है! भूकंप के झटको से लचीली तरंगे उत्पन्न होकर ठोस धरती पर गतिशील हो जाती है! यह स्तिथी जब समुंदर के भीतर या समुंदर के तटवर्ती एरिया में उत्पन्न होती है तो भूकंप के केंद्र पर समुंदर की आन्तरिक सतह तेजी से ऊपर उठती है! और पुनः अंदर जाती है! भूकंप से मुक्त हुई निचे की उर्जा समुंदर के जल को समान्य स्तर से ऊपर उठाकर गतिज उर्जा में परिवर्तित हो जाती है! तथा इन तरंगो को धक्का देकर आगे प्रसारित करने लगती है! कुछ समय के बाद गतिज उर्जा से ओत प्रोत तरंगे सुनामी लहरे के रूप में बदल जाती है! 

ये लहरे अपने मार्ग में आने वाली हर एक चीज़ को नष्ट करते हुए! आगे बढ़ने लगती है! गहरे समुंदर जल में उत्पन्न सुनामी लहरे की वेब लेंथ 500 KM से अधिक होती है! यानी की सुनामी लहरे 500 मील प्रति घंटे की गति से आगे बढती है! इस प्रकार से ये लहरे जेट बिमान की गति को भी पीछे छोड़ सकती है! और 24 घंटे में पुरे समुंदर को आर पार कर सकती है! 

इसमें कोई शक नहीं है की जहाँ पर सुनामी लहरे आती है वहां पर हर एक जगह तबाही ही तबाही होता है! दुनिया में ऐसी बहुत से जगह है जहा पर बहुत ही भयंकर भयकर सुनामी लहरे आई है! जहा पर सुनामी लहरे आती है वहां पर वह पुरे तबाही मचा देती है! सुनामी लहरों से जन और धन दोनों को बहुत ज्यादा नुकसान होता है! समुंदर के किनारे पर बसे शहरो को सुनामी लहरों से सबसे ज्यादा खतरा होता है! क्योकि सुनामी लहरों का सबसे पहला असर समुंदर के किनारों के सहरो के ऊपर पड़ता है! जब भारत के सुनामी लहर आई थी उस समय सबसे ज्यादा नुकसान समुंदर के किनारे वाले शहरो पर हुआ था! और उस सुनामी में अपार मात्रा में जन और धन दोनों का नुकसान हुआ था! सुनामी एक प्राक्रतिक आपदा है इसपर मानव का कोई control नहीं होता है! सुनामी लहरे कभी भी आ सकती है इसका कोई फिक्स समय नहीं तय होता है! इसलिए हम सभी लोगो को मिलकर भगवान से ये प्रार्थना करना चाहिये की हमारे इस सुंदर देश में कभी भी सुनामी लहर ना आये और हमारे भारत देश की सुन्दरता ऐसे ही बनी रहे! 

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Essay on Disability in Hindi- विकलांगता पर निबंध

Essay on Disability in Hindi

                                                                        
हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में Essay on Disability in Hindi मतलब की विकलांगता पर निबंध पढ़ेगें! हमारा जीवन कदम कदम पर अनेक बाधाओ से भरा पडा है! इसलिए हमको हमेशा बहुत सारे परीछाओ और परीछण से गुजरना पड़ता है! हम सभी को अपने पूरी लाइफ में साहस , धैर्य , और उत्साह से कोई भी काम करना चाहिये! जब आप अपने जीवन में कोई भी काम साहस , धैर्य , और उत्साह से करेगें तो आपके सामने कोई भी problem हावी नहीं हो सकती है! इसलिए हमको ये कोशिश करना चाहिये की हम कभी भी अपने साहस , धैर्य, और उत्साह से हट ना पाये! और अपना हर एक काम साहस , धैर्य , और उत्साह के साथ ही करे!

 Essay on Disability in Hindi- विकलांगता पर निबंध 


आज आप देख सकते है की हर एक देश में बिकलांग लोग रहते है! ज्यादातर लोग बिकलांगो के साथ अच्छा ब्यवहार नहीं करते है! आप एक अच्छे ब्यक्ति होने का परिचय तब दे सकते है! जब आप बिना किसी भेद भाव के किसी की मदद करते है! इसलिए हमको बिकलांग के साथ कभी भी बुरा ब्यवहार नहीं करना चाहिये! 

बिकलांग के लिए सफलता का दरवाजा खटखटाते रहना बहुत जरुरी है! इस सम्बन्ध में हेलर के द्वारा कहा गया ये वाक्य बिलकुल सही है! " जब एक  दरवाजा बंद होता है तो दूसरा दरवाजा खुल जाता है! लेकिन हम प्राय: इतनी देर तक बंद दरवाजे को देखते रहते है की हमे वह दरवाजा दिखाई नहीं देता, जो हमारे लिए खुला है! 


यदि आप एक बिकलांग हो या फिर कोई और हो हमारे लिए प्रगति के सारे रास्ते बंद नहीं होते है! लेकिन ये भी सच है की सभी रास्ते सभी के सामने खुल नहीं सकते है! अगर किसी के सामने कोई रास्ता बंद हो जाता है तो उसे दुसरे रास्ते की तलाश की कोशिश करना चाहिये! यही बात बिकलांगो के बारे में लागू होती है! मूक  एवं बधिर हो जाने से उनकी बोलने और सुनने की शक्ति खत्म हो जाती है! लेकिन इसका ये मतलब नहीं होता है की वह कुछ कर नहीं सकते है! वह उच्चतम पढाई कर सकते है और किसी भी एरिया में वह बड़े से बड़े स्तर पर जा सकते है! 


इसी प्रकार नेत्रहिन होने पर लोग अपनी शारीरिक , मानसिक शक्ति से युक्त होते है! वह अध्यापक , प्रोफेसर , कलाकार , साहित्यकार , आदि बन सकते है! इसलिए हम कह सकते है की बिकलांगता जीवन में बाधा तो बन सकती है परन्तु ऐसी बाधा नहीं बन सकती है की आप कुछ कर ही ना सके! 

बिकलांगता दो प्रकार की होती है शारीरिक और मानसिक! इसके कई स्तर है! पूर्ण बिकलांगता , अर्द्धबिकलांगता , और सामान्य बिकलांगता! बिकलांगता इन सभी कारणों से होती है जैसे- जन्म से , पोलियो जैसी बीमारी से और दुर्घटना से तथा युद्ध आदि कारण से होती है! जन्मजात बिकलांगता का कारण मुख्य रूप से कुपोषण है! बिकलांगता की संख्या दुर्घटना और युद्ध के कारण कई गुना अधिक बढ जाती है! बिकलांगता की समस्या का हल दो प्रकार से किया जा सकता है-


1- जो लोग जन्म से बिकलांग है उनका पुर्नवास किया जाय!

2- जिन कारणों से बिकलांगता की संख्या बड रही है उन कारणों को रोका जाये! 

कुपोषण , दुर्घटना और युद्ध को रोका या फिर कम किया जा सकता है! इसमें सरकार , समाज और ब्यक्ति की भूमिका हो सकती है! सरकार को इन सभी चीजों के बारे अच्छी तरह से सोच विचार करके इसको रोकने के लिए सही कदम उठाना चाहिये! सरकार के साथ साथ हम सभी को भी बिकलांगता को रोकने में अपना योगदान देना चाहिये! इसके साथ साथ हमको बिकलांगता से प्रभावित लोगो की मदद करनी चाहिये! उनके साथ हम सभी को बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिये! 


जन्मजात बिकलांगता को रोकने के लिए गर्भवती माँ को पोषण से युक्त आहार का सेवन कराना चाहिये! इसके साथ जन्म के बाद बच्चे और माँ दोनों को पोषण से युक्त आहार की भी इतजाम करना चाहिये! ऐसा करने का मुख्य कारण ये है की बिटामिन A की कमी से बच्चे अंधे हो जाते है! इसलिए बच्चे को नेत्रहिन से बचाने के लिए उनको  पोषण से युक्त आहार को देना चाहिये! समाज कल्याण बिभाग की ओर से इसका इतंजाम किया गया है! लेकिन इतना ही करना काफी नहीं है! इसको और ज्यादा करने की जरूरत है! और इस तरह का इतजाम देश के हर एक गावं में रहना चाहिये! 


रोगों से उत्पन्न होने वाली  बिकलांगता की रोकथाम की जा सकती है! पोलियो , टाईफाइड आदि से बचाव के लिए रोग निरोधक टिके लगाये जा सकते है! कुछ बीमारियों के टिके तो शैशवास्था में ही लगाये जाते है! ताकि कोई रोग न हो! साथ ही बच्चो के स्वास्थ की नियमित जांच होनी चाहिये! वाहन चलाते समय सतर्कता बरत कर सड़क दुर्घटना को कम किया जा सकता है! 


ज्यादातर बिकलांगो को घर परिवार और समाज में अनुकूल वातावरण नहीं मिलता! उनके प्रति उपेछा का ब्यवहार किया जाता है! इसके साथ साथ उनको दया भी दिखाई जाती है! कुछ बिकलांग ऐसे होते है जो अवसर मिलने पर सार्थक कार्य कर दिखाते है! पैरा ओलंपिक खेलो में बिकलागो के कीर्तिमान इसके उदहारण है! इसलिए हमको बिकलांग लोगो को किसी से कम नहीं आकना चाहिये! 


बिकलांगो ने शिछण , प्रशिछण  और दुसरे छेत्रो में भी अनेक प्रकार की समस्या को स्वीकार किया है! उन्होंने छमता और कार्यकुशलता के बल पर अपने सार्थकता को स्वीकार किया है! अत: समाज के नवनिर्माण में बिकलांगो की सार्थक भूमिका हो सकती है! जिसके लिए सरकार कृत संकल्प है! ऐसे में जन सहयोज द्वारा बिकलांगो की स्तिथी बेहतर हो सकती है! 


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4- Essay On Importance Of Water in Hindi – जल के महत्व पर निबंध
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Essay on Nobel Prize in Hindi | नोबल पुरस्कार पर निबन्ध

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Essay on Nobel Prize in Hindi | नोबल पुरस्कार पर निबन्ध

हेलो दोस्तों आज हम Essay on Nobel Prize in Hindi मतलब की नोबेल पुरस्कार पर निबंध को पढ़ेगें! यदि आप न्यूज़ को देखते या फिर पढ़ते होंगें! तो आपने जरुर कही ना नहीं Nobel Prize के बारे में सुना होगा! यदि किसी person को Nobel Prize मिलता है तो ये उसके लिए बहुत सम्मान की बात होती है! इस समय पूरी दुनिया का सबसे बढ़ा अवार्ड Nobel Prize ही है! कई सारे इंडियन को भी उनके बढ़िया काम के लिए  Nobel Prize मिल चूका है! 

Nobel Prize एक ऐसा पुरस्कार है जिसको शांति , साहित्य , भैतिक  शास्त्र, रसायन  शास्त्र, चिकित्सा शास्त्र और अर्थ शास्त्र के छेत्र में लोगो को उनके बढ़िया काम या फिर योगदान के लिए दिया जाता है! Nobel Prize एक ऐसा अवार्ड है जिसमे लिंग , जाति , धर्म , देश और भेद भाव किसी भी तरह की चीजों को नहीं देखा जाता है!  Nobel Prize की शुरुवात 1901 से हुआ था तब से ये पुरस्कार ऊपर बताये गए छेत्र में दिया जाता है! Nobel Prize में मिलने वाते पैसे की बात करे तो अभी Nobel Prize में मिलने वाली राशि 10 लाख dollor से भी ज्यादा है! Nobel Prize किसी को मिलने का मतलब एक बहुत बड़ा सम्मान है इसमें लोग पैसे से ज्यादा सम्मान के ऊपर ध्यान देते है!

जिन लोगो को Nobel Prize मिलता है उनको इसमें मिलने वाली इनाम राशि के अलावा स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र भी दिए जाते है! अब तक 1 हजार से भी ज्यादा प्रतिभावान लोग Nobel Prize पा चुके है! अगर आप सोच रहे है की Nobel Prize केवल पुरुषो को मिलता है तो आप गलत सोच रहे है पुरुषो के साथ साथ महिलायों को भी Nobel Prize दिया जाता है! अभी तक सैकड़ो से भी ज्यादा महिलाये Nobel Prize पा चुकी है! 

स्वीडन के एक बैज्ञानिक अल्फ्रेड बर्नहाई नोबल के नाम पर ही Nobel Prize का नामकरण किया गया था! अल्फ्रेड बर्नहाई नोबल का जन्म 21 अक्तूबर 1833 को एक बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था! एक गरीब परिवार में पैदा होने के बाद भी अल्फ्रेड बर्नहाई नोबल ने अपने मेनहत और लगन से 1866 में डायनामाइट जैसे importent विस्फोटक की खोज करके पूरी दुनिया को चकित कर दिया था!

अल्फ्रेड बर्नहाई नोबल के इस खोज से पूरी दुनिया में उनका डंका बजने लगा! और उनकी इस खोज के कारण उनको बहुत पैसे मिले! अल्फ्रेड बर्नहाई नोबल की मौत से पहले उनके पास 90 लाख dollor रूपए थे! और जब  अल्फ्रेड बर्नहाई नोबल मौत हुई उसके बाद जब उनकी वसीहत को पढ़ा गया तो वह कुछ इस प्रकार था! " मेरे मरने के बाद मेरी सारी राशि एक बैंक में जमा कर दी जाये! और उससे मिलने वाले ब्याज से हर साल शांति , साहित्य , भैतिक  शास्त्र, रसायन  शास्त्र, चिकित्सा  शास्त्र और अर्थ  शास्त्र के छेत्र में महत्यपूर्ण कार्य करने वाले लोगो को पुरस्कार दिया जाये!

जब 10 दिसम्बर 1896 को अल्फ्रेड बर्नहाई नोबल की मौत हुई उसके बाद उनकी वसीहत के अनुसार उनके सारे पैसे को बैंक में जमा करके 1901 से अब तक हर साल 10 दिसम्बर को उस राशि से मिलने वाले ब्याज से नोबल पुरस्कार दिया जाता है! 

Nobel Prize के निर्धारण एक चयन समिति के द्वारा किया जाता है!जब कभी एक विषय पर पुरस्कार पाने वाले की संख्या एक से अधिक होती है! तो पुरस्कार की राशि सबसे समान रूप से बाँट दी जाति है! यदि किसी साल कोई योग्य उम्मीदवार नहीं मिलता है तो उस साल का पुरस्कार नहीं दिया जाता है! किसी ब्यक्ति के मरने के बाद भी Nobel Prize दिया जाता है!

अगर बात भारत की की जाये तो कई ऐसे इंडियन लोग है जिनको Nobel Prize मिला है! साहित्य के लिए रविन्द्रनाथ टैगोर को 1913 में, भैतिक  शास्त्र के लिए 1929 को सी. वी. रमन को,  शांति के लिए 1979 को मदर टेरेसा को, को मिला था! Nobel Prize में मैडम क्युरी का नाम मुख्य रूप से लिया जाता है! क्योकि इनके परिवार का हर एक ब्यक्ति को Nobel Prize मिला था! मैडम क्युरी  को दो बार और उनके पति , बेटे और दामाद को एक एक बार Nobel Prize मिला था! 

किसी भी क्यक्ति के लिए Nobel Prize मिलना बहुत ही सम्मान की बात है! एक देश के लिए Nobel Prize पाना अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है! किसी ब्यक्ति को Nobel Prize मिलने का मतलब ये होता है की वह जिस देश में रहता है उस देश का वह एक अमूल्य नागरिक है! हम उम्मीद करते है की आने वाले समय में हमारे भारत देश के और लोगो को Nobel Prize मिलेगा! 

इनको भी पढ़े- 
1- Essay On Scientist In Hindi- यदि मै  वैज्ञानिक होता पर निबंध
2- Essay On Importance Of Education In Hindi- शिक्षा का महत्व पर निबंध
3- Essay On AIDS In Hindi- एड्स पर निबंध
4- Essay On Black Money In Hindi | काला धन पर निबन्ध
5- Essay On Olympic Games In Hindi- ओलंपिक खेलो पर निबंध

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Essay On Robot In Hindi- रोबोट पर हिंदी निबन्ध


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Essay On Robot In Hindi- रोबोट पर हिंदी निबन्ध


हेलो दोस्तों आज हम Essay On Robot in Hindi मतलब की मोबाइल फ़ोन पर हिंदी निबंध पढेंगे! हम सब जानते है जबाना कितना तेजी से बदल रहा है! जबाने के साथ साथ तकनीक भी बहुत तेजी से बढ़ रहा है! आज कल दुनिया के लोगो कुछ ना कुछ नया चीज़ बनते रहते है! एक जबाना था की हम सब चाँद और तारे की केवल बाते करते थे! लेकिन आज बदलते तकनीक से हमको चाँद और तारो तक जाने का मशीन भी बना दिया! आज हर देश के पास कोई ना कोई ऐसा यंत्र जरुर है जिसके द्वारा वह चाँद और तारो तक जा सकता है! जिस प्रकार से आज के हमारे वैज्ञानिक अलग अलग चीज़े बना रहे! उन अलग अलग चीज़े को एक चीज़ का नाम रोबोट है!

Robot बना कर मनुष्य ने अपना बिकल्प तैयार कर लिया है! रोबोट एक ऐसा मशीन है! जो एक मनुष्य के भाति कार्य करता है! रोबोट मनुष्य की हर एक बात को मानता है! रोबोट को जैसा निर्देश मिलता है ये वैसा ही काम करता है! रोबोट शब्द की उत्पत्ति चेक शब्द रोबाटा से हुआ था! चेक नाट्यकर कारल कायल ने इस शब्द का उपयोग अपने  नाट्यकर "आर यु आर" में किया था! सबसे पहले इस नाटक का मंचन चेकोस्लोवाकिया की राजधानी प्राग में 1921 में हुआ था! फिर देखते ही देखते ये नाटक बहुत पापुलर हो गया! और लोग इसी रोबोट शब्द से परिचित हो गए! इस नाटक का सारांश ये है की मनुष्य के द्वारा बनाये गए रोबोट बाद में मनुष्य को ही अपना दास बना लेता है!

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इस प्रकार मनुष्य की कल्पना में तो रोबोट शब्द का जन्म हो चूका था! लेकिन इसको साकार करने के इए अति उन्नत विज्ञानं की जरूरत थी! कंप्यूटर और इलेक्ट्रानिक के वर्तमान युग में रोबोट का निर्माण कर उपयोग होने लगा! अब ये खोज हो रहा है! की कैसे इसमें कृत्रिम मस्तिक का सयोजन किया जाये! ये कृत्रिम मस्तिक का सयोजन रोबोट को मनुष्य के अनुसार चलने परे मजबूर कर देगा! इसलिए बुद्धिमान Robot के निर्माण हेतु लगातार अनुसन्धान हो रहा है!

आपको इस चीज़ को जानना चाहिये की दुनिया का पहला Robot पशु विज्ञानी विलियम ग्रे वाल्टर ने तैयार किया था! उनका ये मशीन जीवित लोगो बहुत से तरीको का नक़ल करता था! वाल्टर के इस मशीन ने एक नए रास्ते की शुरुवात की इसके करना इस मिलता जुलता और भी बहुत से नयी खोज शुरु हुई! कंप्यूटर के विकास के साथ साथ रोबोट विज्ञानं में भी विकास हुआ! Robot का दिमाक एक तरह का एक कंप्यूटर ही होता है!

रोबोट को लेकर ये बाते होती है! की ये देखने में एकदम आदमी की तरह दिखता है! लेकिन ऐसी कोई बात नहीं जरूरत के हिसाब से इसके शरीर के अंग बनाये जाते है! कोई Robot ऐसा भी होता है! जिसका सिर्फ एक हाथ होता है! और कोई रोबोट केवल चार पैरो वाला होता है!! तो कोई केवल दो हाथ या फिर दो पैर वाला होता है! तरह तरह के कार्य के लिए अलग अलग प्रकार के रोबोट रहते है! जहा तक बात है! रोबोट के प्रकार की तो रोबोट मुख्य रूप से 3 प्रकार के होते है! पहला टार्टल, दूसरा आर्य और तीसरा मोबाइल

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आज के समय में Robot का उपयोग बहुत से कार्यो के लिए किया जाता है! जहा पर बहुत जाया तापमान होता है! अधिक तापमान होने के कारण आदमीं वहा काम नहीं कर पाते है! ऐसी जगह पर रोबोट को काम करने के लिए भेजा जाता है! शल्य चिकित्सा में भी रोबोट की सहायता ली जाने लगी है! इसके साथ साथ अज्ञात परिवेश में काम करने के लिए आदमीं के बजाये रिमोट सी नियत्रण वाले रोबोट को भेजा जाता है! वहा पर ये मशीन मनुष्य के जरूरत की चीजों को इकठ्ठा करते है! मंगल गृह पर से वहा की चीजों को लाने के लिए सबसे पहले रोबोट का उपयोग हुआ था! समुंदर में खोये हुए या फिर दुर्घटनाग्रस्त जहाजो को खोजने के लिए भी रोबोट का उपयोग किया जाता है!

Robot एक उन्नत युग का सन्देश लेकर आया है! आने वाले time में रोबोट मनुष्य के अनुसार या फिर मनुष्य रोबोट का दास बन जायेगा! ये एक बहुत ही जटिल विषय है! हमारे वैज्ञानिक के अनुसार आने वाले time में हर एक रोबोट के द्वारा किया जायेगा! रोबोट का विकाश होने से हमारे बहुत से फायदे होंगे लेकिन ये बात भी सही है की फायदे के साथ साथ हमको बहुत परेसनियो का भी सामना करना पढ़ेगा! रोबोट युग में अगर सब काम रोबोट करेंगे तो आदमी क्या करेंगा और इसकी वजह से उस time में बहुत सारे आदमी बीमार भी हो सकते है! इसलिए हम कह सकते है! की आने वाले time में हमको रोबोट से कई फायदे होने के साथ साथ कई तरह के नुकसान भी होंगे!

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Robot आज पुरे दुनिया की एक नयी खोज बन गयी है! आज ही हम इस बात का अनुमान लगा सकते है की आने वाले time में इस दुनिया का हर एक काम Robot  के द्वारा किया जायेगा! एक सर्वे के अनुसार आने वाले 30 से ४० सालो में सेक्स भी रोबोट मशीन के द्वारा किया जायेगा! कई ऐसी company अभी से सेक्स रोबोट toy बनाना शुरु कर दिया है! अगर आने वाले time में ऐसा हुआ तो इसका सीधा परभाव हम सभी के ऊपर पढ़ेगा! जैसे जैसे दुनिया बदला रही है वैसे वैसे हम अपने आपको एक दम मशीन के ऊपर छोड़ दे रहे है और पुरे मशीन के ऊपर निर्भर होते जा रहे है! रोबोट आने से हम सब पूरी तरह से आलसी होते जा रहे है! अगर ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन इस दुनिया में रोबोट का अधिकार होगा! इसलिए हम सभी को मिलकर इस गंभीर बात कर विचार करना चाहिये! और सभी देशो को मिलकर इसके बारे में एक बढ़िया फैसला लेना चाहिये! मै उम्मीद करता हूँ! की सभी देश मिलकर इसके बारे में सही फैसला करेंगे!

आज के समय में दुनिया का हर एक देश रोबोट बनाने में जुटा है! ये पता लगाना बहुत मुस्किल है की अभी किस देश में कितन रोबोट है! लेकिन एक बात तो तय है की आने वाले समय में हर एक देश के पास बहुत ज्यादा मात्रा में रोबोट होंगा! लोगो का मनाना है की आने वाले time में हर एक देश युद्ध के लिए आदमी के जगह पर रोबोट का इस्तेमाल करेंगे! रोबोट आज के समय में कोई नया खोज नहीं है! रोबोट की खोज प्राचीनकाल से ही होती आ रही है! इसमें को शक नहीं है की आने वाला समय रोबोट का समय होगा! लेकिन हमको इस बात से भी सतर्क रहना होगा की रोबोट का इस्तेमाल करने का मतलब प्रकृत के खिलाफ जाकर काम करना है! और इतिहास गवाह है की जब जब मानव प्रकृति के खिलाफ जाकर कोई काम किया है तब उससे मानव पर बुरा प्रभाव पड़ा है! इसलिए हमको बहुत सोच समझकर अपने इस सुंदर दुनिया में रोबोट उपयोग करना चाहिये! मै उम्मीद करता हूँ! मै जो कहना चाहता हूँ! वह आप समझ चुके होंगे!

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Essay on Sachin Tendulkar in Hindi- सचिन तेंदुलकर पर निबंध

 
Essay on Sachin Tendulkar in Hindi


Essay on Sachin Tendulkar in Hindi-  सचिन तेंदुलकर पर निबंध


हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में Essay on Sachin Tendulkar in Hindi मतलब की सचिन तेंदुलकर पर निबंध पढ़ेगें! भारतीय क्रिकेट की शान और इस दुनिया के नंबर एक बैटमैन का रुतबा रखने वाले मास्टर बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने बहुत ही कम समय और कम उम्र में क्रिकेट में ऐसे रिकॉर्ड बना डाले है! जिसको तोड़ना किसी भी क्रिकेट प्लेयर के लिए आसान काम नहीं है! सचिन तेंदुलकर की run बनाने की भूख और नये नये रिकॉर्ड बनाना उनकी एक बहुत बड़ी आदत थी! सचिन तेंदुलकर क्रिकेट इतिहास में अपना नाम एक महान प्लेयर के रूप में स्थापित कर चुके है! 


सचिन तेंदुलकर का पूरा नाम सचिन रमेश तेंदुलकर है! और सचिन तेंदुलकर ने 1989 में क्रिकेट की दुनिया में अपना पहला कदम रखा था! जब भारतीय क्रिकेट टीम मुश्किल में थी तब तब  सचिन तेंदुलकर ने उन सभी मुस्किलो का सामना करके भारतीय क्रिकेट टीम बाहर निकाला है! 


इसमें कोई शक नहीं है की सचिन तेंदुलकर क्रिकेट की दुनिया के के महान खिलाडी है! सचिन तेंदुलकर की महानता उनके द्वारा बनाये गए रिकॉर्ड से पता चलता है! सचिन ने क्रिकेट की दुनिया में बहुत सारे रिकॉर्ड बनाये है! शायद ही कोई ऐसा क्रिकेट प्लेयर होगा जिसका सचिन के जितना रिकॉर्ड होगा! सचिन तेंदुलकर अपनी कलात्मक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे! सचिन तेंदुलकर ने केवल 16 साल की उम्र में अपना पहला इंटरनेशनल मैच पाकिस्तान के खिलाफ खेला था! 


सचिन तेंदुलकर ने पाकिस्तान के खिलाफ 1989 में अपने ही मैच में महान गेदबाज अब्दुल कादिर की जमकर धुनाई की थी! अपने पहले ही मैच में सचिन तेंदुलकर ने  अब्दुल कादिर के एक ओवर में 4 चौके के साथ कुल 27 रन बनाकर पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी थी! इसके साथ साथ 2003 के word cup में पाकिस्तान के रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से पहचाने जाने वाले गेदबाज शोएब अख्तर के एक ही ओवर में 18 run बनाये थे! 


सचिन तेंदुलकर दुनिया के पहले ऐसे बैटमैन थे जिसने एकदिवसी मैच में दोहरा शतक लगाया था! इसके साथ साथ और भी बहुत से रिकॉर्ड  सचिन तेंदुलकर के नाम पर है! सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड की गिनती हम नहीं कर सकते है! जब सचिन तेंदुलकर ने संन्यास नहीं किया था तब वह अपने ही रिकॉर्ड को तोड़कर उसके जगह पर नया रिकॉर्ड बनाने में बहुत माहिर थे! 


कई बार भारत की जीत और हार के बीच खड़े होने वाले सचिन ने जिस कौसल से दबाव का सामना किया उसने उनको कुंदन बना दिया! सचिन तेंदुलकर ने ये साबित कर दिया की स्तिथियों में भी प्रतिभा के प्रसून प्रस्फुटीत होते है! सचिन तेंदुलकर के द्वारा बनाया गया रिकॉर्ड ही उनकी प्रतिभा की बानगी के लिए काफी है! 


सचिन तेंदुलकर ने अपने क्रिकेट जीवन में 200 टेस्ट मैच खेले! अपने 200 टेस्ट मैच में सचिन तेंदुलकर ने 15000 से भी ज्यादा run बनाये! टेस्ट मैच में सचिन तेंदुलकर ने 51 शतक और 68 अर्धशतक लगाय! सचिन तेंदुलकर का टेस्ट मैच में के पारी में सबसे ज्यादा स्कोर 248 run का है! अगर एकदिवसी मैच की बात की जाये तो सचिन तेंदुलकर ने कुल 463 एकदिवसी मैच  खेले है! और इन सभी मैचो में 18000 से भी ज्यादा run बनाये! जिसमे से 49 शतक और 96 अर्धशतक शामिल है!   एकदिवसी  मैचो में सचिन तेंदुलकर का एक पारी में सबसे ज्यादा स्कोर 200 run है! 


सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड इतना बड़ा है की अभी तक क्रिकेट के इतिहास में कोई भी प्लेयर यहाँ तक नहीं आ सका है! रनों का एक पहाड़ बना चुके सचिन तेंदुलकर ने जब क्रिकेट से संन्यास लिया तब उनके रिकॉर्ड की संख्या और ज्यादा हो गयी थी! सचिन तेंदुलकर के इतने ज्यादा रिकॉर्ड है की उनके रिकॉर्ड को तोडना कोई आसान काम नहीं है! अभी तक कोई भी प्लेयर सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड को तोड़ नहीं पाया है! सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड को तोड़ने की कोशिश अभी भी जारी है! 


युवाओ का आदर्श बने सचिन तेंदुलकर का कैरियर बेदाग़ और विवादों से परे रहा है! क्रिकेट की दुनिया में लगातार दो दशक तक खेलना अपना आप में एक बहुत बड़ी बात है! जब सचिन तेंदुलकर क्रिकेट खेल रहे थे तब उनके खेल पर उनके उम्र का कोई प्रभाव नहीं दिखाई देता था! सचिन तेंदुलकर खेल के मैदान पर बहुत चुस्त और तंदरुस्त रहते थे! सचिन तेंदुलकर की फिटनेस कमाल की थी! 


इस दुनिया की महान संगीतकार लता मांगेशकर ने सचिन तेंदुलकर के बारे में कहा था की " मै सचिन को धरती पर भेजा गया भगवान का एक चमत्कार मानती हूँ! सचिन एक अभिन्न कृति एवं चमत्कार है मै उनको नमस्कार करती हूँ!" 


प्रतिउत्तर में सचिन ने कहाँ : मुझे जब तेज खेलना होता है तो मै  लता मांगेशकर का तेज गीत गुनगुनाने लगता हूँ! और धीरे खेलना होता है तो दर्द भरा!" इस पर  लता मांगेशकर ने कहा " मुझे रियाज के समय कोई लम्बी तान छोडनी होती है तो मै सचिन का छक्का याद कर लेती हूँ! 


इसमें कोई शक नहीं है की सचिन एक महान क्रिकेट खिलाडी है! सचिन तेंदुलकर की महानता का आकलन उनका खेल में दिखाता है! हम सब को अपने आप पर गर्व करना चाहिये की सचिन  तेंदुलकर जैसा खिलाडी हमारे भारत देश में पैदा हुआ! 


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