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Essay on Railway Station in Hindi – रेलवे स्टेशन पर निबंध



Essay on Railway Station in Hindi


Essay on Railway Station in Hindi – रेलवे स्टेशन पर निबंध

हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में Essay on Railway Station in Hindi मतलब की रेलवे स्टेशन पर निबंध पढ़ेगें! हर एक देश में रेलवे स्टेशन एक ऐसा जगह होता है जहाँ पर हर रोज लाखो लोग सफ़र करते है! सभी लोग रेलवे स्टेशन पर जाकर जंहा पर जाना होता है वहां के लिए ट्रेन का इन्तजार करते है! आज के इस आर्टिकल में मै आपको  रेलवे स्टेशन के एक अनुभाव को आपके साथ  शेयर करूँगा! मै उम्मीद करता हूँ की आपको rail yatra essay in hindi पसदं आयेगा! यदि आपको rail yatra essay in hindi पसदं आये तो इसको अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले

आज के समय में सभी लोग एक स्थान से दुसरे स्थान पर अपने काम के लिए रोज सफ़र करते है! लोग एक जगह से दुसरे जगह पर जाने के लिए कई तरह तरह का साधन का उपयोग करते है! आज के समय में एक स्थान से दुसरे स्थान पर जाने के लिए सबसे ज्यादा ट्रेन का उपयोग किया जाता है! लोग ट्रेन का उपयोग इसलिए करते क्योकि ट्रेन का भाडा बस और टेक्सी के मुकाबले कम होता है! सभी ट्रेन से सफ़र करने के लिए हर रोज  रेलवे स्टेशन पर जाते है! आज के समय में भारत के  रेलवे स्टेशन में जितनी भीड़ होती है उसको देखकर जिन्दा आदमी भी मर जायेगा! भारत के  रेलवे स्टेशन पर भीड़ का ये आलम केवल एक  रेलवे स्टेशन पर नहीं होता बल्कि ये भारत के सभी  रेलवे स्टेशन पर होता है! सभी  रेलवे स्टेशन पर हर रोज लाखो लोग सफ़र करने के लिए आते है!


आज मै आपको रेलवे स्टेशन की एक ऐसे अनुभव को शेयर करने जा रहा हूँ! जिसको मैंने महसूस किया! मेरा नाम सददम हुसेन है और मै गोरखपुर उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ! जहाँ पर मेरा घर है उससे 10 किलोमीटर दूर गोरखपुर  रेलवे स्टेशन है! मै आपके जानकारी के लिए बता दू! की गोरखपुर  रेलवे स्टेशन पुरे एशिया का सबसे बड़ा  रेलवे स्टेशन है! एक दिन मै घर पर बैठ कर मोबाइल में game खेल रहा था! तभी मेरे पिता जी आये और पिताजी ने कहाँ की बेटा आज हमारे कोई दूर के रिश्तेदार आने वाले है! हमारे रिश्तेदार गोरखपुर पहली बार आ रहे है! और वह ट्रेन के द्वारा आ रहे है! इसलिए तुम जाकर उनको गोरखपुर  रेलवे स्टेशन से उनको pick कर लो! मै गोरखपुर रेलवे स्टेशन कहाँ पर है इसको जनता था लेकिन कभी भी  रेलवे स्टेशन पर गया नहीं था! मैंने सोचा चलो आज  रेलवे स्टेशन भी देख लेगें और घूमते घूमते अपने रिश्तेदार को भी लेते आयेगें! जो हमारे रिश्तेदार घर पर आने वाले थे उनसे मै एक बार अपने मामा के लड़के के शादी में मिला था! इसलिए मै उनको आसानी से पहचान सकता था!


पिता जी ने मुझसे कहा की इतने बजे ट्रेन आयगी! और तुम ट्रेन आने से 2 घंटा पहले ही  रेलवे स्टेशन पर पहुच जाना! पिता जी के अनुसार मै ट्रेन आने से 2 घंटा पहले ही  रेलवे स्टेशन पर पहुचने के लिए निकल दिया! मै अपने घर से कुछ दूर से  रेलवे स्टेशन जाने के लिए एक बस में बैठा ! बस जैसे ही 5-6किलोमीटर तक चला तब ही रास्ते में बस खराब हो गयी! ड्राईवर ने बस में हुए समस्या को देखते हुए कहाँ की बस को बनाने में 2 घंटा लगेगा! मैंने सोचा की जब तक बस बनेगा तब तक तो रिश्तेदार का ट्रेन आ जायेगा! इसलिए मैंने दूसरा बस पकरने की सोची! मैंने दूसरी बस को रुकवाने में लग गया लेकिन कोई भी बस नहीं रुकी! इसलिए मैंने पैदल ही रेलवे स्टेशन जाने का निश्चय किया! जहाँ पर बस खराब हुआ था वहां से रेलवे स्टेशन 2 से 3 किलोमीटर था! इसलिए मैं पैदल ही रेलवे स्टेशन तक चल दिया!


जब मै रेलवे स्टेशन के लिए चल तब रास्ते में बहुत traffic और भीड़ का सामना करना पडा! भीड़ और traffic का सामना करते करते कैसे कैसे मै रेलवे स्टेशन पर पहुचा! जब मै रेलवे स्टेशन पर पंहुचा तो वहां का नजारा कुछ और था! मैंने देखा की पूरा रेलवे स्टेशन लोगो से भरा पडा है! कही पर भी पाँव रखने की जगह नहीं है! कही पर यात्री खड़े है तो कही पर उनका सामान! अब मेरे सामने ये समस्या थी की मै प्लेटफार्म टिकट कैसे लू! गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर जाने के लिए आपके पास  प्लेटफार्म टिकट होना चाहिये! अब मै उस खिड़की को तलासने लगा जहाँ पर  प्लेटफार्म टिकट मिलता है! फिर मैंने एक आदमी से पूछा की  प्लेटफार्म टिकट कहाँ मिलता है! जब मै उस आदमी के बताये गए जगह पर गया तो मै देखता रह गया क्योकि जहाँ पर  प्लेटफार्म टिकट मिल रही थी! वहां पर बहुत ही भारी मात्रा में लोग पहले से ही थे! मेरे रिश्तेदार के ट्रेन के आने का समय भी हो गया था! इसलिए मै बिना  प्लेटफार्म टिकट लिए ही स्टेशन पर चल दिया!


अब मै रेलवे स्टेशन के  उस प्लेटफार्म को ढूढने लगा जहाँ पर रिश्तेदार की ट्रेन आने वाली थी! जिस प्लेटफार्म पर  रिश्तेदार की ट्रेन आने वाली वह प्लेटफार्म नंबर 4 था! मै जहाँ पर खड़ा था वह प्लेटफार्म नंबर 2 था! मुझे प्लेटफार्म नंबर 2 से प्लेटफार्म नंबर 4 पर जाना था! पूरा  रेलवे स्टेशन आदमी और सामान से भरा पड़ा था! खुदा ही जनता है की मैंने कितना धक्का मुक्की से  प्लेटफार्म नंबर 2 से प्लेटफार्म नंबर 4 पर पंहुचा!


प्लेटफार्म नंबर 4 पर जाते जाते मै बहुत थक गया था! मुझे थोडा बैठने के लिए जगह की जरूरत थी! और मै बैठने के लिए इधर उधर जगह तलासने लगा! लेकिन इतना अधिक भीड़ की वजह से मुझे कही पर भी बैठने के लिए जगह नहीं मिल रही थी! जहाँ पर  मै खड़ा था वहां पर भी लोगो के आने जाने से धक्का मुक्का लगता रहता था! जहाँ पर मै खड़ा था वहां पर तरह तरह की ध्वनि सुनाई देती थी! कोई भीख मांग रहा था तो कोई अपना सामान बेच रहा था! और भी ना जाने कौन कौन सी ध्वनि वहां पर सुनाई दे रही थी!


मै थका भूखा हारा वहां पर ट्रेन के आने का इन्तजार करने लगा तभी किसी ने जोर से कहाँ की ट्रेन आ रही है! मैंने पलट पर देखा की सचमुच ट्रेन आ रही है! जैसे ही ट्रेन आये मानो की कोई युद्ध छिड गया हो! कोई ट्रेन पर चढ़ने के लिए तो कोई ट्रेन से उतरने के लिए आपस में धक्का मुक्की करने लगे! कई लोगो ने तो मुझे भी इस भीड़ में नुकसान पंहुचा दिया! मै जैसे तैसे इधर उधर अपने रिश्तेदारों को खोजने लगा! तब कुछ ही देर में ट्रेन चल दी! अभी तक मुझे अपने रिश्तेदार नहीं मिले थी! मै दौड़े दौड़े हर के ट्रेन की बोगी में उनकी तलास करने लगा! लेकिन वह मुझे कही पर नहीं मिले!


इतने में ट्रेन भी पूरी तरह चल दी! मै हतास होकर एक ब्रेंच पर बैठ गया! और यही सोचने लगा की मै पिताजी को क्या जबाब दूंगा! तभी एक आदमी मेरे पास आकर बोला सद्दाम तुम यहाँ पर क्या कर रहे हो! जब मैंने उस आदमी को पलट कर देखा तो मै देखता ही रह गया! क्योकि वह कोई और नहीं मेरे रिश्तेदार थे!मै बहुत खुश हुआ! और उनसे पूछा की बाकि के लोग कहाँ पर है! तो उन्होंने कहाँ की बाकी के लोग उस पेड़ के निचे बैठे है! मैंने जाकर उन सभी लोगो से मिला और हम सभी ने वहां से घर जाने के लिए एक बस पकड़ी!  रास्ते में मेरे रिश्तेदार ने मुझे पूछा की रेलवे स्टेशन तक आने में तुमको कोई दिक्कत तो  नहीं हुई! मै उनकी ये बात सुनकर हँसने लगा! आधे घंटे बाद हम सभी लोग घर पहुचे!


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Essay on Mother Teresa in Hindi- मदर टेरेसा पर निबन्ध

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Essay on Mother Teresa in Hindi- मदर टेरेसा पर निबन्ध

हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में Essay on Mother Teresa in Hindi मतलब की मदर टेरेसा पर निबंध पढ़ेगें! संसार में प्रेम दया एवं सेवा का सन्देश फ़ैलाने वाली तथा अनेक तरह तरह के पुरस्कारों से सम्मानित मदर टेरेसा का जन्म अल्बानिया के एक मध्यवर्गीय रोमन कैथोलिक परिवार में 26 अगस्त 1910 को हुआ था! मदर टेरेसा की माँ कपड़े की सिलाई कढाई की दुकान चलती थी! और उनके पिता एक भवन बनाने वाले थे मतलब की एक भवन निर्माता थे! हम सभी मदर टेरेसा को मदर टेरेसा के नाम से जानते थे लेकिन उनका real नाम मदर टेरेसा नहीं था उसका real नाम एग्नेस गोक्सा बोजस्क्यू  था! मदर टेरेसा के परिवार में उनके अलावा और भी कई भाई बहन थे! अपने सभी भाई बहन में मदर टेरेसा सबसे छोटी थी! चुकी मदर टेरेसा अपने परिवार में सबसे छोटी थी इसलिए परिवार के सभी लोग मदर टेरेसा को बहुत पसंद करते थे और उनसे बहुत प्यार भी करते थे! 

जब मदर टेरेसा छोटी थी तब उनके पिता की किसी कारणवश मौत हो गयी! पिता की मौत के बाद मदर टेरेसा का परिवार आर्थिक संकट से गुजरने लगा! मदर टेरेसा का परिवार भले ही मध्यवर्गीय था फिर भी उनके परिवार के लोग लोगो की मदद करने में हमेसा आगे रहते थे! जब मदर टेरेसा के पिता की मौत हुई थी उसके बाद उनके घर की आर्थिक स्थिथि खराब हो गयी थी! मदर टेरेसा के घर के स्तिथी खराब होने के बाद भी मदर टेरेसा की माँ पैसे बचाकर परोपकार के कार्य में लगाती थी! अपनी माँ को ऐसा करते देख मदर टेरेसा  के अंदर भी  परोपकार के कार्य करने की इच्छा पैदा होती थी! माँ के कार्यो का  मदर टेरेसा पर बहुत प्रभाव पडा!  मदर टेरेसा बचपन से ही अपनी माँ की तरह सामाजिक कार्यो में हिस्सा लेने लगी!  मदर टेरेसा को  सामाजिक कार्यो को करने में बहुत अच्छा लगता था! 

मदर टेरेसा की सुरुवाती पढाई लिखाई युगोस्लाविया में हुआ था! जब मदर टेरेसा 18 साल की थी तब इतने कम उम्र में ही मदर टेरेसा ने एक कठोर निर्णय ले लिया था! केवल 18 साल की उम्र में ही मदर टेरेसा ने सांसारिक से अलग होकर नन बनने का निर्णय किया और अपने काम करने के लिए भारत देश के कोलकाता शहर को चुना! ऐसा करने के लिए मदर टेरेसा ने लारेटो सम्प्रदाय की सदस्य बन गई! उस समय लारेटो सम्प्रदाय के लोग पहले से ही पश्चिम बंगाल में धर्म प्रचार का काम कर रहे थे! इस प्रकार 18 साल की आयु में सन 1928 में परिवार देश सब कुछ छोड़कर कोलकत्ता चली आई! जब मदर टेरेसा कोलकत्ता आ गयी उसके बाद वह कोलकत्ता में सेंट मैरी में एक teacher के रूप में अपना काम करना शुरु किया! 

जब मदर टेरेसा  सेंट मैरी में एक teacher थी तो उस समय में एक teacher के रूप में मदर टेरेसा अपने स्टूडेंट के बीच में बहुत पापुलर रही थी! जिस स्कूल में मदर टेरेसा एक teacher थी उस स्कूल से सटे मोतीझील नामक एक मुहल्ला था! इस मुहल्ले में जो लोग रहते थे वह सभी लोग बहुत ही गरीब थे! गरीब होने के साथ साथ उन सभी लोगो को लोग अछूत जाति के लोग मनाते थे! कुल मिलकर ये कोलकत्ता शहर का सबसे गंदा मुहल्ला था! मदर टेरेसा को उस मुहल्ले की दुर्दशा देखी नहीं गयी! और उस मुहल्ले को अच्छा बनाने के इरादे से मदर टेरेसा हर रोज भोजन और दवाइया लेकर उस गंदे मुहल्ले में जाने लगी! मदर टेरेसा को इतना अच्छा काम करते देख उनके कुछ स्टूडेंट के अंदर भी ऐसा काम करने की भावना आई! और उनके कुछ स्टूडेंट मदर टेरेसा के साथ उनका हाथ बटाने लगे! इस तरह से मदर टेरेसा ने अपने बढ़िया काम की वजह से उस गंदे मुहल्ले को अच्छे मुहल्ले में बदला दिया! 

 मदर टेरेसा यही नहीं रुकी! और वह लारेटो नन के काले और सफ़ेद कपड़े को त्याग दिया और उसकी जगह पर नीले किनारे की मोती धोती पहनकर हाथ में बाइबिल लेकर अपना पूरा जीवन दुखी , पीड़ित एवं अनाथ लोगो की सेवा में समर्पित कर दिया! सोचने वाली बात को ये है की जिस समय मदर टेरेसा स्कूली जीवन का परित्याग करके इस काम को करने के लिए गयी थी उस समय उनके पास केवल 5 रूपए थे! फिर भी मदर टेरेसा ने हिम्मत नहीं हारी!  मदर टेरेसा ने परिश्रम , लगन , एवं अपने इष्ट यीशू मसीह के विश्वास के सहारे इस दुनिया की पहली महिला सेविका मदर टेरेसा के नाम से बिख्यात हुई! मदर टेरेसा ने अनाथो में ब्याप्त रोज एवं अशिछा को दूर करने तथा परित्यक्त शिशुओ को आश्रय देने और मृतप्राय बिना आश्रय की देख भाल करने का जिम्मा उठाया! 1950 में मदर टेरेसा ने मिशनरीज आफ चैरितिज की स्थापना की! मिशनरीज आफ चैरितिज में पूरी दुनिया में मिशन की गतिबिधिया संचालित होती है! मदर टेरेसा के द्वारा कुष्ट रोगियों के इलाज के लिए कोलकाता के निकट टीटागढ़ में स्थापित  प्रेम निवास तो सुचमुच प्रेम का संचार करता है! 

अगर मदर टेरेसा को अवार्ड की बात की जाये तो मदर टेरेसा को बहुत से अवार्ड मिले है! मदर टेरेसा को अवार्ड के रूप में जो पैसे मिलते थे! उन पैसो से वह एक नया आश्रम खोल देती थी! यहाँ पर मै आपको मदर टेरेसा को मिलने वाले कुछ मुख्य आवर्ड के बारे में बताता हु! उम्मीद है की आपको ये पसंद आयेगा! 

1- 1962 में भारत सरकार द्वारा पदम् श्री 
2- 1972 में जवाहर लाल नेहरु सदभावना अवार्ड 
3- 1973 में इंग्लैंड के राजकुमार के द्वारा हैपुलहन अवार्ड 
4- 1974 में अमरीका के द्वारा मास्टर ऑफ़ मैजिस्ट अवार्ड 
5- 1978 में नोबल पुरष्कार 
6- 1980 में भारत रत्न 

ये मदर टेरेसा को मिलने वाले कुछ अवार्ड थे! इन सभी अवार्ड के अलावा और भी बहुत से अवार्ड मदर टेरेसा को मिले थे! मदर टेरेसा को 1978 में नोबल पुरष्कार मिला था! आपके जानकारी के लिए बता दू की नोबल पुरष्कार इस दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे सम्मानित आवर्ड है! किसी भी ब्यक्ति को नोबल अवार्ड मिलना उसके लिए बहुत सम्मान की बात है! 1980 में मदर टेरेसा को भारत रत्न से भी नवाजा गया था! भारत रत्न इंडियन का सबसे बड़ा आवर्ड है! मदर टेरेसा के कामो की तुलना हम इन आवर्ड से नहीं कर सकते है! क्योकि उनके द्वारा किया गया काम उनके ही जैसे महान है! जिसकी हम केवल मिसाले दे सकते है! 

मदर टेरेसा को दिए जाने वाले पुरष्कारो के बारे में कहा जाता है की ये पुरस्कार मदर को सम्मानित नहीं करते बल्कि वे ही मदर से सम्मानित होते है! नार्वे की नोबल शांति पुरस्कार समिति के अध्यछ फ्रांसिस सजोतांद का कहना है की पापुलर शांति पुरस्कार के लिए मदर का चयन करने में कमेटी को गौरव महसूस हुआ था! सुचमुच उनका उपयुक्त कथन शत प्रतिशत सही है! क्योकि मदर टेरेसा का त्याग और तप पुरस्कारों की सीमा से परे है! 

लेकिन काल किसी को नहीं छोड़ता है! दया एवं ममता की प्रतिमूर्ति तथा दुनिया के अनाथो की आश्रयदात्री मदर टेरेसा 5 सितम्बर 1997 को चल बसी! मदर टेरेसा के बारे में कहा जा सकता है की धरती पर कभी कभी ऐसे संत महापुरुष अवतरित होते है! जो अपने कार्यो से जन मानस में एक छाप छोड़ जाते है! हम सभी को भी मदर टेरेसा के कार्यो को याद करके उनसे प्रेरणा लेना चाहिये! 

मै उम्मीद करता हु की आपको Essay on Mother Teresa in Hindi पसंद आया होगा! यदि आपको ये Essay on Mother Teresa in Hindi Language पसंद आया है तो इसको अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर करना ना भूले!

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Laghu Udyog in Hindi- लघु उद्योग के बारे में बेसिक जानकारी

Laghu Udyog in Hindi

Laghu Udyog in Hindi- लघु उद्योग के बारे में बेसिक जानकारी  

हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में laghu udyog in hindi मतलब की laghu udyog के बारे में पढ़ेगें! जब भी हम laghu udyog का नाम सुनते है तो उसके बाद हमारे मन में सिर्फ एक ही सवाल आता है की आखिर ये laghu udyog होता क्या है! छोटे मोटे काम को जो एक normal person भी start कर सकता है उसको laghu udyog कहाँ जाता है! laghu udyog का मतलब छोटा मोटा उद्योग होता है! आज के समय में laghu udyog एक बढ़िया जरिया है जिसके द्वारा हम अपने आपको सफल बना सकते है! laghu udyog की सबसे बढ़िया बात ये होती है की इसको कोई भी start कर सकता है! 

laghu udyog को आप अपने घर पर से भी start कर सकते है! मुर्गी पालन, मोमबत्ती बनाना, बिस्कुट बनाने की दूकान खोलना, आदि काम laghu udyog के अंदर आते है! laghu udyog एक ऐसा उद्योग है जिसको कोई भी आम आदमी थोड़े पैसे में खोल सकता है! laghu udyog को हम एक तरह से छोटा पैमाने पर business कह सकते है! यदि आपके पास कोई रोजगार नहीं है तो आप भी अपने अनुसार कोई भी laghu udyog खोल सकते है! laghu udyog start करने के लिए आपको एक बढ़िया प्लानिंग की जरूरत होगी! एक बढ़िया प्लानिंग के साथ साथ थोड़े पैसे की भी जरूरत होगी! 


कोई भी laghu udyog start करने से पहले आपको इस बात का ध्यान देना होगा की आप जो laghu udyog खोल रहे है उससे related कोई और आपके आस पास उस उद्योग को तो नहीं कर रहा है! laghu udyog के बारे में अच्छी बात ये होती है की इसको खोलने के लिए आपको किसी high profile जगह की जरूरत नहीं होती है! आप किसी भी तरह के laghu udyog को अपने घर start कर सकते है! 

आज हमारा भारत भले ही एक आजाद देश हो गया हो लेकिन आज भी भारत में बहुत से ऐसे लोग है जिनके पास रोजगार के नाम पर कोई काम और धंधा नहीं है! अगर हम बेरोजगारी को भारत का सबसे बड़ी समस्या कहे तो उसमे कोई गलत बात नहीं होगा! भारत में बहुत से ऐसे लोग भी है जो अच्छी अच्छी डिग्री लेने के बाद भी बेरोजगार है! भारत से बेरोजगारी को खत्म करने के लिए laghu udyog एक बहुत ही बढ़िया माध्यम है! जो लोग बेरोजगार से जूझ रहे है उन लोगो को अपने खुद का कोई laghu udyog खोल लेना चाहिये! laghu udyog आपके बेरोजगारी की समस्या को खत्म कर सकता है! 


जब हम कोई laghu udyog खोलने के बारे में सोचते है तो हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या पैसे की होती है! कोई भी laghu udyog खोलने के लिए आपके पास थोड़े पैसे होना बहुत जरुरी है! यदि आपके पास कोई laghu udyog start करने के लिए कोई पैसे नहीं है तो आप बैंक से जाकर अपने laghu udyog के लिए पैसे लोन के द्वारा ले सकते है! हमारी भारत सरकार ने बहुत से ऐसे स्कीम निकली है जिसके द्वारा आपको बहुत ही कम ब्याज दर पर अपने laghu udyog ने लिए पैसे मिल सकते है! आपको अपने laghu udyog के लिए बैंक से तभी कम ब्याज पर पैसे मिलेगें जब आप अपने laghu udyog का पूरी जानकारी बैंक को बताएंगें! इस तरह से हम कह सकते है की आप अपने laghu udyog के लिए बैंक से कम ब्याज दर पर लोन ले सकते है!


यदि आप किसी भी तरह का कोई laghu udyog start करते है तो उससे आपको बहुत सारे फायदे होते है! कोई भी laghu udyog खोलने का सबसे बढ़िया फायदा ये होता है की आपके इसमें बहुत ही कम पैसे लगते है! मतलब की आपको कोई छोटा मोटा laghu udyog के लिए ज्यादा पैसे की जरूरत नहीं होती है! भारत सरकार की laghu udyog start करने वाले लोगो को पूरा support करती है! और आपके laghu udyog के द्वारा बेचने वाले चीजों पर बहुत ही कम कर लगाती है! laghu udyog के द्वारा बनाने वाले समान की market में काफी डिमांड रहता है! इसके साथ साथ laghu udyog का एक सबसे बढ़िया फायदा ये भी है की किसी भी laghu udyog के लिए आपको मशीने, कच्चा माल और काम करने वाले मजदुर बहुत ही कम रेट पर आपको बहुत ही आसानी से मिल जाते है! 


कोई भी laghu udyog आप 1 लाख से लेकर 1 करोड़ तक में start कर सकते है! कोई भी laghu udyog खोलने से पहले आपको उस उद्योग के बारे में अच्छी तरह से research कर लेनी चाहिये! इसके साथ साथ आपको इस बात की भी अच्छी research कर लेनी चाहिये की आप अपने laghu udyog के द्वारा जो सामान बना रहे है उस सामान में market में कितनी मांग है! laghu udyog कई तरह के होते है जैसे निर्माण छेत्र और सेवा छेत्र! यदि आप पहली बार कोई laghu udyog खोलने जा रहे है की आपको इस छोटे पैमाने पर start करना चाहिये! पहले ही बार में आपको बहुत सारा paisa laghu udyog में नहीं लगाना चाहिये! 


आपको वही laghu udyog खोलना चाहिये जिसमे आपकी रूचि हो! इसके साथ साथ आप अपने laghu udyog के माध्यम से जो समान बनाये वह ग्राहकों को पसंद आना चाहिये! कभी भी ग्राहकों को चीट करने की कोशिश ना करे! यदि आप ग्राहकों को cheat करके अपने laghu udyog का सामान बेचते  है तो आपका laghu udyog कभी भी सफल नहीं होगा! और आपको बहुत ही जल्दी असफलता मिल सकती है! इसलिए अपने ग्राहकों को अच्छा से अच्छा सामान देने की कोशिश करे! 


यदि आप सही तरीके से कोई laghu udyog start करते है तो आपको उसमे सफल होने की संभावना बढ़ जाती है! यदि अभी तक आपके पास कोई रोजगार नहीं है तो यही समय है अपने laghu udyog को start करने का! जब तक आप किसी भी चीज़ में action नहीं लेंगें तब तक आपका जीवन सफल नहीं होगा! इसलिए action लेने से मत डरे! मै उम्मीद करता हूँ! की आप भी बहुत ही जल्द अपने खुद का कोई laghu udyog start करके अपने बेरोजगारी को दूर करेगें!   


मै उम्मीद करता हु की आपको Laghu Udyog in Hindi पसंद आया होगा! यदि आपको ये Laghu Udyog in Hindi Language पसंद आया है तो इसको अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर करना ना भूले!


प्रिय मित्रो यदि आपके पास भी Laghu Udyog in Hindi से related कोई इनफार्मेशन हो तो आप उस इनफार्मेशन को मेरे पर्सनल ईमेल  [email protected] पर भेज सकते है! हम आपके उस इनफार्मेशन को आपके नाम और फोटो के साथ अपने वेबसाइट पर प्रकाशित करेंगे!


आपके पास Laghu Udyog in Hindi में और Information हैं, या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो तुरंत हमें email करके बताये हम इसको update करते रहेंगे! अगर आपको Laghu Udyog in Hindi अच्छा लगे तो इसको  facebook पर share कीजिये..
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Kutir Udyog in Hindi- कुटीर उद्योग के बारे में जानकारी


Kutir Udyog in Hindi

Kutir Udyog in Hindi- कुटीर उद्योग के बारे में जानकारी 

हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में Kutir Udyog in Hindi मतलब की कुटीर उद्योग के बारे में हिंदी आर्टिकल को पढ़ेगें! ऐसे छोटे बड़े उद्योग जिनमे मशीन और पूंजी की प्रधानता न होकर काम की प्रधानता होती है वे Kutir Udyog कहलाते है!  कुटीर उद्योग में अधिक से अधिक दस हाथो का सहयोग होना चाहिये! इसके लिए बड़ी पूंजी , बड़े भूखंड और बड़े बाजार की जरूरत नहीं होती है! Kutir Udyog को एक परिवार या फिर पास पडोस के लोग मिलकर इसे अपने घर में ही बहुत ही आसानी से चला सकते है! 

किसी देश की आर्थिक सम्पन्नता और खुशहाली में Kutir Udyog का बहुत ही विशेष योगदान रहता है! आज जापान पुरे एशियाई देशो में सबसे अधिक खुशहाल देश है! जापान के बारे में कहाँ जाता है वहां का छोटा सा घर भी एक लघु उद्योग का केंद्र है! हमारी पुरानी सामाजिक ब्यवस्था में भी Laghu Udyog का बहुत बड़ा महत्व था! कृषि के अतिरिक्त ग्रामीण जनता छोटे छोटे Laghu Udyog में लगी हुई थी! मोची जुटा, बढाई लकड़ी का सामान, कुम्हार मिट्टी के बर्तन, और तेली कोल्हू से तेल आदि चीज़े तैयार करने में लगा रहता था! 

गावं की गरीब महिलाये छोटे मोटे कामो से जीविका चलाती थी! इस तरह से गावं के बिभिन्न वर्ग विभिन्न प्रकार के उत्पादों में लगे रहते थे! वे एक दुसरे की जरूरत को पूरा करते थे! इसी वजह से पुराने समय के गावं स्वावलम्बी और सुखी रहते थे! Kutir और Laghu  उद्योग के बारे में गाँधी जी ने कहा था " कोई भी देश Laghu-Kutir Udyog को अनदेखा कर विकास नहीं कर सकता है! खासकर भारत जैसा विकासशील एवं गावं का देश!"

वर्तमान युग मशीनी युग है! अब लोग मोची के स्थान पर बड़ी बड़ी कम्पनियों के जुते पसंद करते है! कोल्हू के तेल के स्थान पर मिलो के तेल प्रयोग करने लगे है! हाथ से बने कपड़ो के स्थान पर सिंथेटिक कपड़े पहनने लगे है! इस प्रवृत्ती से नुकसान यह हुआ की Kutir Udyog का महत्व लोगो की नजरो में कम हो गया है! इसके कई अन्य नुकसान भी हुए है! बड़ी बड़ी मशीनों की चिमनियो से निकले धुएं से पर्यावरण प्रदूषण की समस्या बढ़ी है! गाँधी जी कहा कते थे! " मशीनों को काम देने से पहले आदमी को काम दो" Kutir Udyog की स्थापना में कई problem का निदान संभव है! 

बेरोजगारों को काम देने के लिए  कुटीर उद्योग बहुत ही कारगर उपाय है! घर घर में  कुटीर उद्योगो का जाल बिछना चाहिये! ऐसे कई Kutir Udyog है जो सैकड़ो - हजारो हाथो को काम दे सकते है! मधुमक्खी पालन, चमडा उद्योग, डेयरी फार्म, हस्तकरघा  उद्योग, लकड़ी एवं मिट्टी के खिलवने, सिले सिलाय कपड़े, मोमबत्ती उद्योग, मुर्गी पालन, मछली पालन , आदि महत्वपूर्ण Kutir Udyog में आते है! इन  कुटीर उद्योग की सफलता के लिए सरकार का सहयोग अपेछित है! 

हमारे भारत सरकार को चाहिये की वह इन Kutir Udyog के प्रशिछण की बढ़िया से बढ़िया व्यवस्था करे! किसी को भी इस तरह के  कुटीर उद्योग शुरु करने के लिए कम ब्याज पर ऋण दिलाये तथा कच्चे माल एवं उत्पादित चीजों की बिक्री हेतु बाजार उपलब्ध कराये! इन सबके अलावा सरकार को इन  कुटीर उद्योगो के संनछण पर भी विशेष ध्यान देना चाहिये! बड़े  उद्योगो की स्थापना से छोटे उद्योग मृतप्राय हो जाते है! 

इस प्रकार भारत जैसे निर्धन एवं अपार जनसख्या वाले देश के लिए कम पूंजी पर आधारित Kutir Udyog धंधे आर्थिक विकास की रीढ साबित हो सकते है! इससे बढती बेरोजगारी को भी कम किया जा सकता है! 

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Saddam

Bird Flu In Hindi Language | बर्ड प्लु के बारे में बेसिक जानकारी

Bird Flu In Hindi

Bird Flu In Hindi Language | बर्ड प्लु के बारे में बेसिक जानकारी 

आज हम इस आर्टिकल में Bird Flu In Hindi Language मतलब की बर्ड प्लु के बेसिक चीज़ों के बारे में पढ़ेगें! आज कल हम लोग आये दिन बर्ड प्लु बीमारी के बारे में सुनते है! आज कल बर्ड प्लु एक बहुत ही जटिल बीमारी बन गयी है! बर्ड प्लु की बीमारी को सबसे ज्यादा मुर्गियों में पाया गया है! बर्ड प्लु की वजह से बहुत सारी मुर्गिय मर जा रही है! अभी तक बर्ड प्लु को ठीक तरीके से ठीक करने के लिए कोई बढ़िया दवा नहीं बना है! भारत में भी बर्ड प्लु  की बीमारी काफी तेजी से बढ़ रही है! हमारे सरकार को बर्ड प्लु बीमारी के निजाज के लिए कोई बढ़िया कदम उठाना होगा! हम उम्मीद करते है! की आने वाले दिनों में हम अपने देश से बर्ड प्लु बीमारी को पूरी तरह भगा देंगें!

एवियन इंप्लुएंजा अर्थात बर्ड प्लु एक छुट की बीमारी है! जो एक तरह से वायरस से फैलता है! बर्ड प्लु की बीमारी ज्यादातर पछियों में होती है! लेकिन कभी कभी बर्ड प्लु के कारण सूअर भी प्रभावित हो जाते है! वैसे यह बीमारी जानवरों में होती है लेकिन देखा गया है की कई बार बर्ड प्लु मनुष्य को भी प्रभावित कर गयी है! बर्ड प्लु एक बहुत ही जटिल बीमारी है जो आये दिन पछियों में होता रहता है! अभी हाल ही में हमारे दिल्ली शहर में बर्ड प्लु के कारण बहुत सारे मुर्गियों की मौत हो गयी और इसके साथ साथ बहुत सारी मुर्गिय अभी भी इससे प्रभावित है! 


घरेलू मुर्गी फर्मो में बर्ड प्लु से दो तरह की बीमारी होने की शंका रहती है! जिसमे से पहले वाले को निम्न और दुसरे वाले को उच्च कहा जाता है! किसी मुर्गी में निम्न वाली बीमारी होने पर उस मुर्गी के पंख बिखर जाते है! और वे नम अंडे देने लगती है! उच्च वाली बीमारी होने पर मुर्गिया 48 घंटे के अंदर मर जाती है! 


बर्ड प्लु से प्रभावित मनुष्यों में बुखार , खासी , गले में खराश , मांसपेशियों में दर्द , न्युमोनिया , सांस लेने में तकलीफ तथा जीवन को संकट में डालने वाली जटिलताएं पैदा हो जाती है! वैसे बर्ड प्लु के लछन इसको फ़ैलाने वाले वायरस पर निर्भर करता है! बर्ड प्लु से प्रभावित पछियों के लार , नाक से निकलने वाले पानी तथा मुहं से निकलने वाली भाप में वायरस होता है! इन सभी चीजों के संपर्क में आने पर दुसरे पछियों को भी बर्ड प्लु हो जाता है! मनुष्य में भी यह बीमारी इसी तरह फैलती है! लेकिन बर्ड प्लु एक पछी से दुसरे पछी में फैलता है! एक मनुष्य से दुसरे मनुष्य में इसको फैलते हुए बहुत कम बार पाया गया है! 


बहुत से प्रवासी पछी सर्दियों में भारत आते है! यदि वे बर्ड प्लु से प्रभावित है तो यह बीमारी भारतीय पछियों में भी फ़ैल सकती है! जहाँ तक मनुष्यों में इस बीमारी के फैलने की बात है तो वायरस अपने रूप और कार्य बदलते रहते है! अगर बर्ड प्लु का वायरस ऐसे रूप में आ जाता है जिससे मनुष्य प्रभावित हो सकते है! तो ये जरुर चिंता की बात होगी! इस बीमारी को दूर करने के लिए अभी तक दो दवाईयों को उपयोग किया जा रहा है! जिन दो दवाईयों का उपयोग इसके इलाज के लिए किया जा रहा है उसका नाम ओसेलटा ( टैमीप्लु) और जसमइविट (तैलेंजा) है! यदि इन दोनों दवा को बीमारी की शुरुवात में ही दे दिया जाये तो इस बीमारी से ठीक होने की संभावना ज्यादा रहती है! ये दोनों दवा वायरस की सतह पर पाय जाने वाले न्यूरामिनिडेस नामक प्रोटीन को खत्म कर देता है! जिससे यह एक कोशिका से दुसरे कोशिका में नहीं जा पाता है! 


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