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Essay On Prime Minister in Hindi- यदि मै प्रधानमंत्री होता पर निबंध

Essay On Prime Minister in Hindi-

Essay On Prime Minister in Hindi- यदि मै प्रधानमंत्री होता पर निबंध 


हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में Essay On Prime Minister in Hindi मतलब की "यदि मै प्रधानमंत्री होता" पर निबंध पढ़ेगें! विश्व के वर्तमान माहौल में किसी भी राष्ट्र का  prime minister होना काटों का ताज पहनना , मुसीबतों का पहाड़ उठाना , जलते अंगारों पर चलना है या फिर आग के दरिया में कूदना है! अगर यो कहा जाये की साछात काल के मुह में जाना है तो अतियोक्ति नहीं होगा! अब्राहम लिंकन, हिटलर , जुल्फिकार , जिया उल हक़ तथा प्रेमदास आदि की मौत इसका प्रमाण है! समस्याग्रस्त भारत के प्रधानमंत्री भी ऐसे हादसे से नहीं बचे है! इंदिरा गांन्धी और राजीव गाँधी की दर्दनाक मौत इसका प्रमुख्य उदहारण है!

भारतीय संबिधान में prime minister का पद सबसे प्रमुख्य पद बनाया गया है! और हर एक नागरिक इस पद का हकदार है! प्रत्येक राजनीतिज्ञ इस जोखिमपूर्ण गौरवशाली पद पर आरूढ़ होने के लिए लालायित रहता है! पद की प्राप्ति हो या ना हो लेकिन मनमोदक तो खाया ही जा सकता है! अत: अवसर मिलने पर जनता के प्रेम को ठुकराना मेरे लिए मुश्किल हो जायेगा! सत्तासीन होकर एक राष्ट्रभक्त की भाति मेरे हर पल राष्ट्र की उन्नति में ब्यतीत होगा! भगत सिंह, चन्द्रसेखर आजाद, महात्मा गाँधी , राजेन्द्र प्रसाद, और लाल बहादुर शास्त्री मेरे आदर्श होंगे! 


भारत एक प्रजातांत्रिक देश है! समानता प्रजातंत्र का मूल मन्त्र है! लेकिन भारत में चारो ओर बिषमता व्याप्त है! बिह्संती अट्टालिकाओ के पार्श्व में रोटी झोपडिया इसकी मूक गवाह है! इस विषमता के कारण आज सर्वत्र अराजकता एवं अशांति है! राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी कहते है! 


शांति नहीं तब तक, जब तक सुख - भाग न नर का सम हो

नहीं किसी को बहुत अधिक हो , नहीं किसी को कम हो!

अत: prime minister बनने पर विषमता की इस खाई को मिटाना मेरा प्रथम कार्य होगा! अशिछा, बेरोजगारी, गरीबी, जातीयता , साम्प्रदायिकता एवं आतंकवाद हमारे देश के प्रमुख्य समस्या है! मेरी समझ में अशिछा और बेरोजगारी सबसे मुख्य समस्या है इनसे निजात पाने के लिए लार्ड मैकाले की वर्तमान शिछा प्रणाली के स्थान पर रोजगारपरक  शिछा प्रणाली लागू की जाएगी! कृषि जो भारतीय अर्थब्यवस्था की रीढ़ है उसमे सहकारिता एवं विज्ञान को शामिल कर दूसरी हरित क्रांति लाई जाएगी! घर घर में कुटीर उद्योग का जाल बिछा कर बेरोजगारी की समस्या दूर की जाएगी! गौ- पालन पर विशेष ध्यान देकर दूध उत्पादन में श्वेत क्रांति लाना भी मेरी सरकार का प्रमुख्य कार्य होगा! यह भी ब्यवस्था की जाएगी जिससे हर हाथ को काम मिल सके! 


आज भारतीय राजनीति में असामाजिक चीजों का बोलबाला है! सत्ता में बने रहने के लिए राजनीतिक लोग इनसे हाथ मिलाये रहते है! मै सत्ता में रहू या ना रहू लेकिन मेरे प्रधानमंत्रित्व काल में राजनीति का अप्राधिकरणनहीं होने दिया जायेगा! मेरी सरकार अपराधियों , आतंकवादियों , मुनाफाखोरो एवं भ्रष्ट कर्मचारियों के साथ सख्ती से पेस आएगी! इसके अलावा सामरिक छेत्र में विकास की वर्तमान दर में वृद्धि की जाएगी! ताकि कोई दुश्मन हमारी सिमायो में आंख उठाकर ना देख सके! जातीयता , जो सामाजिक सरसता के मार्ग में इन दिनों सबसे बड़ी बाधा बनकर खाड़ी है उसके दमन के लिए अंतरजातीय विवाह करने वालो को प्रोत्साहित किया जायेगा! 


अंतरजातीय विवाह करने वालो के लिए नौकरी और विधानसभा , बिधान परिषद, लोकसभा एवं राज्यसभा में सीटे आरक्षित की जाएगी! देश में अशांति फ़ैलाने वाले ताकतों को हमारी सरकार कुचल कर ही दम लेगी! विश्व कल्याण के लिए दछेस , निर्मुट सम्मेलन एवं संयुक्त राष्ट्र संघ आदि को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में मेरा जोरदार प्रयास रहेगा! भारत का मूलमंत्र अहिंसा और विश्व बधुत्व को सारे विश्व में फ़ैलाने के लिए अशोक महराज की भाति मेरा प्रयास रहेगा! मुझे पूरा विश्वास है की इन कार्यकर्मो को ईमानदारी पूर्वक कार्य करने से भारत एक बार फिर संपन्न और शक्तिशाली देश बन जायेगा! 


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Essay on Discipline in Hindi- अनुशासन पर निबन्ध

Essay on Discipline in Hindi

 Essay on Discipline in Hindi- अनुशासन पर निबन्ध

हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में Essay on Discipline in Hindi मतलब की अनुशासन पर निबंध को पढ़ेगें! हम सभी को पता है की Discipline का हमारे जीवन में कितना महत्व है! Discipline केवल हमारे लिए ही नहीं बल्कि हमारे देश के लिए भी बहुत जरुरी है! हम सभी के साथ साथ हमारे सरकार को भी एक Discipline में रहना चाहिये! मै उम्मीद करता हूँ की आपको Essay on Discipline in Hindi का ये आर्टिकल पसंद आयेगा! यदि आपको  Essay on Discipline  in Hindi पसंद आये तो इसको अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले-

Discipline एक ऐसा शब्द है! जिसको हम सभी के अंदर होना बहुत जरुरी है! हर एक के जीवन में अनुशासन का होना बहुत जरुरी है! हम सभी को अपना हर एक काम अनुशासन में रहकर करना चाहिये! यदि हम एक स्टूडेंट है तो हमको अपने अंदर अनुशासन रखना बहुत जरुरी है! एक स्टूडेंट होने के नाते हमको अपना हर एक काम Discipline में रहकर करना चाहिये! किसी भी व्यक्ति के जीवन में अनुशासन उसको एक सही दिशा में लेकर जाता है! इसके साथ साथ अनुशासन में रहने पर हम अपने आपको बुरी चीजों से दूर रखते है! इस तरह से हम कह सकते है की हर एक जीवन में Discipline का होना बहुत जरुरी है! 


शासन के आगे उपसर्ग "अनु" लगने से अनुशासन शब्द बना है! अनु शब्द का अर्थ है पीछे पीछे! इस प्रकार अनुशासन शब्द का सही अर्थ शासकीय कानून तथा सामाजिक मान्यताओ से है! अत: इसका पालन करना ही अनुशासन है! हमारे जीवन में अनुशासन बहुत ही जरुरी है! परिवार एवं रास्ट्र को सुब्यवस्थित रखने के लिए अनुशासन बहुत ही जरुरी है! जिस परिवार में पुत्र पिता के और पुत्री माता के अनुशासन में ना रहे वह परिवार अब्यवस्थित हो जाता है! उसी प्रकार यदि सरकारी कार्ययालय में कर्मचारी अनुशासन में न रहे तो कार्यालय में अब्यवस्था फ़ैल जाती है!


अध्यापक को प्रधानाध्यापक के प्रधानाध्यापक को प्राचार्य के एवं स्टूडेंट को teacher के अनुशासन में रहना पड़ता है! अगर बात सैनिक की करे तो सैनिक बिना अनुशासन के एक पग भी नहीं चल सकते है! अर्थात अनुशासन मानव जीवन के एक जगह पर बहुत जरुरी है! अनुशासन के बिना हमारे द्वारा किया गया हर एक काम असफल हो सकता है! अनुशासन के बारे में महात्मा गाँधी जी ने बहुत ही बढ़िया बात कही है! महात्मा गाँधी जी ने कहाँ है की 

"अनुशासन के बिना ना परिवार चल सकता है और ना ही संस्था या राष्ट्र"


महात्मा गाँधी के द्वारा कहे गए ये शब्द  एकदम सही है! इसमें कोई शक नहीं है की यदि किसी परिवार में अनुशासन ना हो तो उस परिवार में हमेसा कुछ ना कुछ होता रहता है! यदि किसी  राष्ट्र में अनुशासन ना हो तो उस राष्ट्र के लोग कभी भी ख़ुशी से अपना जीवन नहीं बीता पायेगें! इसलिए हम कह सकते है की बिना  अनुशासन के हम एक अच्छा जीवन नहीं ब्यतीत कर सकते है! हमारे जीबन अनुशासन का होना बहुत ही जरुरी है! 


हर एक ब्यक्ति में बचपन से ही Discipline का बीज डालने की कोशिश की जाती है! बच्चा अपने माँ के प्यार , पिता की डाट एवं बड़ो के मार्गदर्शन में अनुशासित जीवन ब्यतीत करते हुए बड़ा होता है! बच्चो में डाला गया  अनुशासन का यह बीज धीरे धीरे अंकुरित होने लगता है! जब बच्चे स्कूल जाते है! तब उनको स्कूल में भी  अनुशासन का पाठ पढाया जाता है! स्कूल में विद्यार्थी शब्द ज्ञान के साथ साथ स्कूल के नियमानुसार संयमित जीवन ब्यतीत करते है! गुरुजनों के बढ़िया आचरण को समीप को देखकर उसका अनुकरण करते है!  


इस प्रकार प्राथमिक विद्यालय से महाविद्यालय तक की अवधि में विधार्थियों में अनुशासन का वह अंकुरित बीज बड़ा होकर एक पेड़ का रूप ले लेता है! ऐसे ही स्टूडेंट ब्यवहारिक जीवन में पदाधिकारी अथवा सेना में उचाधिकारी बनते है! और इनके ही इशारे पर सैकड़ो कर्मचारी या सैनिक अपना काम करते है! ऐसे ही छात्र  जब देश का नेतृत्व करते है तब उनके पीछे पूरा देश चल पड़ता है ! 


लेकिन ये गंभीर चिंता का विषय है की आज के युवा जो देश के भावी कर्णधार है उनमे Discipline की बहुत कमी है! अनुशासनहीनता और आज का विद्यार्थी दोनों एक दुसरे के पर्याय बन गए है! छोटी सी घटना से लेकर दंगा फसाद , आगजनी तथा तोड़फोड़ आज के समय में एक आम बात हो गयी है! आज के युवा का exam में मर्यादा का हनन करना तो उनका जन्मसिद्ध अधिकार बन गया है! 


आज के समय में  exam में नक़ल से रोकने पर गुरुजनों को अपमानित करना तो आम बात हो गया है! आज के teacher का डंडा छात्रों को नहीं डराती है बल्कि teacher ही छात्र के छुरे से डरते है! इस तरह से हम कह सकते है की इन सभी कुरीतियों के मूल कारण अनुशासनहीनता है! स्टूडेंट में ब्याप्त इस अनुशासनहीनता के अनेक कारणों में राजनीति सबसे ज्यादा जिम्मेदार है! आज के राजनीति के नेता अपने काम को करवाने के लाइट स्टूडेंट को चुनते है! इसी का प्रभाव है की आज समाज में सर्वत्र अराजकता व्याप्त है! 

यदि बढ़िया देश बनाने के लिए हर एक देश के हर एक व्यक्ति को Discipline का पालन करना बहुत जरुरी है! जब एक देश का हर एक व्यक्ति Discipline का पालन करेगा! तभी एक बढ़िया देश की शुरुवात होगी! और वह देश विकास की तरफ बहुत ही तेजी से जायेगा! अनुशासन ही संघठन की कुंजी और प्रगति की सीढ़ी है! चलो आज हम सभी लोग ये संकल्प लेते है की आज से हम अपने आपको एक Discipline  में रखेगें! और देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान देंगें! 


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Dr Rajendra Prasad Biography In Hindi- डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय

Dr Rajendra Prasad Biography In Hindi


Dr Rajendra Prasad Biography In Hindi- डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय

हेलो दोस्तों आज हम Dr Rajendra Prasad Biography In Hindi मतलब की डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय पढेंगे! भारत का इतिहास गवाह है की बिहार अनेक महापुरुषों की जन्मस्थान रहा है! हमारे भारत के बहुत से ऐसे महापुरुष है जिनका जन्म बिहार में हुआ! बिहार में अशोकचन्द्रगुप्त जैसे और भी महान लोगो का जन्मस्थल रहा है! इन सभी महापुरुष की list में हमारे आजाद भारत के पहले राष्टपति भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद का भी नाम आता है!  डॉ. राजेंद्र प्रसाद बचपन से ही प्रतिभा के धनी थे! जिस समय बिहार , बंगाल , और उड़ीसा राज्य की प्रवेश exam सम्मलित रूप में होती थी! उस समय  डॉ. राजेंद्र प्रसाद सबसे पहले स्थान पर आये थे! 

हम लोग इसी बात से  डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रतिभा का अनुमान लगा सकते है! जब teacher डॉ. राजेंद्र प्रसाद की पुस्तक को जाँच रहा था तब teacher ने उत्तर पुस्तिका पर लिखा था की स्टूडेंट teacher से ज्यादा योग्य है! इस तरह की टिप्पणी किसी के विषय में देना अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है! इस तरह की टिप्पणी आज के समय में भी नहीं दिया जाता है! आजाद भारत के पहले रास्ट्रपति बनकर डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने " होनहार बिरवान के होत चीकने पात" वाली कहावत को सही कर दिया! डॉ. राजेंद्र प्रसाद अपने प्रतिभा और लगन के कारण ही हमारे आजाद भारत के पहले रास्ट्रपति चुने गए! डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसी महान बिभूति पर हमारे भारत देश को गर्व है! 

अगर बात की जाये डॉ. राजेंद्र प्रसाद के जन्म की तो डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसम्बर 1884 को बिहार प्रान्त के सारण जिले के जिरोदेई नामक ग्राम में एक बहुत ही साधरण परिवार में हुआ था! चुकी डॉ. राजेंद्र प्रसाद का परिवार एक बहुत ही साधरण परिवार था इसलिए उनके घर में हमेशा आर्थिक तंगी रहती थी! आर्थिक तंगी के कारण  डॉ. राजेंद्र प्रसाद का पालन पोषण सभी चीजों के अभावों में हुआ था! लेकिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद के घर की आर्थिक तंगी उनकी पढाई में बाधक नहीं बन सकी! high school से लेकर M.A. तथा M.L तक की सभी exam में डॉ. राजेंद्र प्रसाद प्रथम आये थे! हर एक क्लास में first क्लास से पास होना डॉ. राजेंद्र प्रसाद को एक प्रतिभावान ब्यक्ति शाभित करता था!


M.L की पढाई करने के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने जल्दी ही वकालत प्रारंभ कर दी जो बहुत ही अच्छी तरह से चलने लगी! अब डॉ. राजेंद्र प्रसाद के परिवार के लोग बहुत खुश थे! क्योकि डॉ. राजेंद्र प्रसाद की सहायता से उनके परिवार की आर्थिक तंगी धीरे धीरे खत्म होने लगी थी! लेकिन इसके बाद भी डॉ. राजेंद्र प्रसाद को गुलाम भारतीयों का कष्ट देखा नहीं जा रहा था! डॉ. राजेंद्र प्रसाद को अपने परिवार के कष्ट से ज्यादा इन करोडो भारतवासियों का कष्ट ज्यादा दुखदायी लगा! इसलिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने वकालत को छोड़कर गाँधी जी के साथ आजादी की लड़ाई में सिपाही बन गए! 1917 में जब गाँधी जी चंपारण आन्दोलन के सिलसिले में बिहार गए तो डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उनका पूरा सहयोग किया! तभी से लोग डॉ. राजेंद्र प्रसाद को बिहार का गाँधी कहकर पुकारने लगे! 

डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत की आजदी की लड़ाई के लिए बहुत बार जेल जाना पडा! इसके साथ साथ इनको शारीरिक यातनाये भी दी गयी! जिसके कारण डॉ. राजेंद्र प्रसाद को दमा का रोग हो गया! अंग्रेजो के द्वारा दिए गए बहुत सारे  शारीरिक यातनाये भी डॉ. राजेंद्र प्रसाद की हिम्मत को तोड़ नहीं पायी! और वह और जोश के साथ स्वतंत्रा आन्दोलन में भाग लेते रहे! 


जब भारत देश आजाद हुआ तब डॉ. राजेंद्र प्रसाद को उनके प्रतिभा के अनुरूप भारतीय संबिधान सभा का अध्यक्ष बनाया गया! यह इनकी मेनहत और प्रतिभा का ही फल था की भारत को बहुत की कम समय में 90000 शब्दों का एक विशाल संबिधान मिल गया! 26 जनवरी 1950 को इनको पुरे सम्मान के साथ आजाद भारत का पहला रास्ट्रपति बनाया गया! डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने रास्ट्रपति भवन में रहकर जिस सादगी का परिचय दिया वह अपने आप में एक अनूठी मिसाल है! डॉ. राजेंद्र प्रसाद  रास्ट्रपति की बिस्तर को छोड़कर एक आम आदमी की तरह चौकी पर सोते थे! उस समय रास्ट्रपति का बेतन 10000 था! डॉ. राजेंद्र प्रसाद को 10000 बहुत ज्यादा पैसे लगते थे इसलिए वह केवल हर महीने 2500 रूपए ही लेते थे! केवल 2500 रूपए से ही वह अपना पूरा खर्चा चलते थे! इस प्रकार हम कह सकते है की डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के रास्ट्रपति होने के बाद भी एक आम आदमी की तरह अपना जीवन ब्यतीत करते थे! जो की उनको एक महान आदमी बनाता है! 


रास्ट्रपति बनाने के कुछ सालो बाद से उनकी तबियत अक्सर खराब होने लगी! जिस कारण डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 14 मई 1962 को रास्ट्रपति पद से अवकास लेकर पटना के सदाकस आश्रम में एक सन्यासी की भाति रहने लगे! 28 जनवरी 1963 को इनकी मौत हो गयी! जिस दिन इनकी मौत हुई थी उस दिन पूरा भारत शोक की लहर में खो गया! बाद में इस महान सपूत को भारत रत्न से नवाजा गया! डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जीवन सभी के लिए प्रेरणा से भरा है! हम सभी को उनके जीवन से कुछ ना कुछ सीखना चाहिये! 


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Essay on Child Labour in Hindi- बाल मजदूरी पर निबंध

Essay on Child Labour in Hindi

Essay on Child Labour in Hindi- बाल मजदूरी पर निबंध

हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में Essay on Child Labour in Hindi मतलब की बाल मजदूरी पर निबंध को पढ़ेगें! इसमें कोई शक नहीं है की आज के समय में भारत की अर्थब्यवस्था दिन प्रतिदिन बहुत ही मजबूत होती जा रही है! लेकिन एक सच्चा भारत का नागरिक होने के नाते हमको इस कठिन सत्य को भी मानना चाहिये की हमारे भारत के कुछ जनसंख्या का एक तिहाई लोग अभी भी गरीबी रेखा से निचे का जीवन यापन करते है! इसमें कोई शक नहीं है की Child Labour की समस्या मुख्य रूप से गरीबी से सम्बंधित है! आज भारत में आपको बहुत से ऐसे बच्चे मिल जायेंगें! जो लोग अपने बहुत कम आयु में बाल मजदूरी करते है! 

जिन बच्चो को पढ़ लिखकर अपना जीवन सवारना चाहिये , उन बच्चो को दुकानों , घरो, एवं फैक्ट्रियो में कठोर श्रम करना पड़ता है! हैरानी के बात तो ये है की इतना श्रम करने के बाद भी उनको आधा पेट भोजन और गन्दी गन्दी गालियाँ मिलती है! दिन प्रति दिन हमारे इस भारत देश में बाल मजदूरी की समस्या बढती जा रही है! बाल मजदूरी भारत की एक बहुत ही गंभीर समस्या है! हर साल हम लोग राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर Child Labour Day को मनाते है! बाल मजदूरी के मौके पर हम सभी लोग बच्चो को देश का भावी कर्णधार बताकर उनके उचित पालन पोषण का संकल्प भी लेते है! लेकिन फिर भी बाल मजदूरी की समस्या कम नहीं हो रही है!  

Child Labour की समस्या दिन प्रति दिन बहुत ही भयंकर होती जा रही है! भारत में बाल मजदूरी की समस्या कोई नयी बात नहीं है! बाल श्रमिको में पिछड़े जनजातीय छेत्रो और दूर देहात के बच्चे हुआ करते है! प्राय: वही बच्चे बाल श्रमिक होते है जिनके माता पिता बहुत ही गरीब होते है! माता पिता के गरीब होने पर बच्चे पढाई करने के बजाये मजदूरी करते है! हम कह सकते है की बाल मजदूरी का मुख्य वजह गरीबी है! 

Child Labour समस्या का मूल कारण घोर दरिद्रता ही है! कुछ बच्चे माता पिता के कठोर ब्यवहार से तंग आकर घर से भाग जाते है! जिसके कारण उनको एक मज़बूरी में बाल मजदूरी करना पड़ता है! निर्धनता, दूब्यवहार , कुसंगित आदि के कारण लोग बाल मजदूरी करते है! बाल श्रम के कुछ परम्परागत कारण भी है! मोची, बढई, लोहार , खेतिहर , आदि स्वभाव से ही श्रमजीवी होते है! जैसे ही इनके बच्चे बड़े होते है! वैसे ही उनको छोटे मोटे कामो में लगा दिया जाता है! वे उनकी पढाई एवं पालन पोषण पर ध्यान नहीं देते है! क्योकि वह खुद भी पढ़े लिखे नहीं रहते है! 


युवायो की तुलना में बाल मजदुर सस्ते मिल जाते है! इनसे मालिको को कोई खतरा भी नहीं रहता! कम दाम और मनमाना काम यह मनोवृतिबच्चो के शोषण के पीछे साफ़ देखा जा सकता है! भारत सरकार के कानून के अनुसार 14 साल से कम आयु वाले बच्चो से काम करवाना कानूनन अपराध है परन्तु इसकी परवाह कौन करता है! कई बार गरीबी और भुखमरी के कारण माँ बाप अपने बच्चे को धनी ब्यक्ति के घर पर बेचते देखे गए है! तब उनकी स्तिथी बंधुआ मजदुर जैसी हो जाती है! ऐसे में उनको कठोर श्रम कराने के साथ साथ अमानवीय व्यवहार भी किया जाता है! इसलिए हम कह सकते है की हमारे समाज और हमारे देश के फ्यूचर के लिए Child Labour का निराकरण करना बहुत ही जरुरी है! 


हर एक देश के बच्चे उस देश की सम्पति और आने वाले कल के नागरीक होते है! इसलिए हर एक देश का पहला कर्यव्य ये होना चाहिये की वह अपने देश की सम्पति की रक्षा करे और इनके विकास पर उचित ध्यान दे! लोगो को जो चीज़ बाल श्रमिक बनने पर मजबूर करती है उनको दूर करने के लिए  सरकार को कदम उठाना होगा! सरकार के साथ साथ हम आम नागरीक को भी बाल श्रमिक कारण को कम करने के लिए अपना योगदान देना चाहिये! यदि  Child Labour के ऊपर ध्यान नहीं दिया गया तो बाल श्रमिको के रूप में मानवता तो पिसती हो रहेगी! और इसके साथ साथ बाल श्रमिक के द्वारा हमारा फ्यूचर भी खतरे में पड़ सकता है! इस अमानवीय लापरवाही के कारण इतिहास हमको कभी माफ़ नहीं करेगा! इसलिए हम सभी को मिलकर बाल श्रमिक के बारे में बढ़िया उपाय करना होगा! 


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Essay On Importance of Book in Hindi- पुस्तकों के महत्व पर निबंध

Essay On Importance of Book in Hindi

Essay On Importance of Book in Hindi- पुस्तकों के महत्व पर निबंध 

हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में Essay On Importance of Book in Hindi मतलब की जीवन में पुस्तकों का महत्त्व पर निबंध पढ़ेगें! पुस्तक का हमारे जीवन पर बहुत ही गहरा प्रभाव रहता है! कहा जाता है की पुस्तके मनुष्य की सबसे बढ़िया साथी होती है! पुस्तको के बिना मानव का जीवन बहुत ही बोरिंग होता! इस आर्टिकल में आप पुस्तको के महत्व को एक निबंध के रूप में पढ़ेगें! मै उम्मीद करता हूँ की आपको importance of book in our life in hindi पसंद आयेगा! यदि आपको Essay On Importance of Book in Hindi पसंद आये तो इस निबंध को अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे! 


पुस्तक का हमारे जीवन में कितना महत्व है इसकी हम कल्पना नहीं कर सकते है! पुस्तक ही एक ऐसी चीज़ होती है जिससे हमको ज्ञान मिलता है! ज्ञान के बिना जीवन ब्यर्थ है! प्राचीन काल से बहुत से ऐसे लोग हुए है जो पुस्तको के द्वारा बहुत ज्ञान प्राप्त किये और उसी ज्ञान को पूरी दुनिया में फैलाये! कहाँ जाता है की पुस्तकों में भगवान का वास होता है! एक स्टूडेंट अपने पुरे लाइफ में हर एक जगह पर पुस्तक पढता रहता है! बिना पुस्तक का एक स्टूडेंट स्टूडेंट नहीं बनता है! हम सभी लोग अपने लाइफ में बहुत से पुस्तकों को पढ़ते है! और उन पुस्तकों से बहुत सारा ज्ञान अपने अंदर ग्रहण करते है! अगर आज के समय की बात की जाये तो आज के समय में वैज्ञानिक लोग अलग अलग तरह के पुस्तक को पढकर ही नयी नयी चीजों की खोज करते है! इसमें कोई शक नहीं है की पुस्तकों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है! पुस्तकों के बिना हमारा जीवन बेकार है! 


आज के समय में आपको हर एक तरह की पुस्तके पढने के लिए बहुत ही आसानी से मिल जाती है! अगर हम पुस्तकों को ज्ञान का भंडार कहा जाये तो इसमें कोई गलत बात नहीं होगी! क्योकि सच में पुस्तके ज्ञान का भंडार होती है! आज के समय में आपको प्रचीनकाल से लेकर आधुनिक काल की सभी तरह की पुस्तके आसानी से मिल जाती है! आपको जिस पुस्तक में रूचि हो वह पुस्तक हर एक भाषा में मिल जाती है! हर एक मनुष्य अपने रूचि के अनुसार पढने के लिए किसी पुस्तक का चयन करता है!  

आज से कई सौ साल पहले पुस्तक नहीं छपा करती थी! क्योकि उस समय लोगो के पास इसको छापने का idea नहीं था! लेकिन आज के इस आधुनिक युग में हर रोज तरह तरह की नयी नयी पुस्तके छपा करती है! पहले के जबाना में लोग वाणी के द्वारा ही लोगो को ज्ञान का पाठ पढ़ाते थे! धीरे धीरे जैसे जैसे समय गुजरता गया वैसे ऐसे ही विकास का कार्य तेज होता गया! और आज बात ये हो गया  है की आपको हर महान पुरुष के द्वारा कही गयी बात को आप आसानी से पुस्तक के द्वारा पढ़ सकते है! हम एक अच्छे मानव तभी बनेगें जब हम सभी महान पुरुष के विचारो को पढ़कर उनके विचारो का पालन करे! और सच्चे मन से लोगो की मदद करे! 


जब कोई अकेले में रहता है तब उस समय उस ब्यक्ति का पुस्तके सबसे बढ़िया साथी होती है! दुसरे के साथ बेकार संगति बनाने से बढ़िया है की पुस्तको को अपना संगति बनाये! पुस्तके मानव को सबसे बढ़िया दोस्त होती है जो हमको अपने ज्ञान की धारा को देती है और बदले में हमसे कुछ नहीं लेती है! पुस्तके लोगो के अंदर की बुरी चीजों को निकालकर उनके अंदर सचाई की धारा को भरती है! इस तरह से कह सकते है की पुस्तके हमारे जीवन को बढ़िया करने में अपना बहुत योगदान देती है! 


अगर हम सभी पुस्तक का अध्यन करे तो पुस्तके हमको निडर बनाती है! और मुसीबत से लड़ने के लिए हमारे अंदर जोश भरती  है! इसके साथ साथ पुस्तके भटके लोगो को सही मार्ग दिखाती है! इसके साथ साथ पुस्तके हमारा मनोरंजन भी करती है! आज के समय में आपको हर धर्म की पुस्तक मिल जाएगी! हमको चाहिये की हम हर एक धर्म की पुस्तक को पढ़कर उन पुस्तकों का ज्ञान अपने अंदर ग्रहण कर ले! धर्म की पुस्तकों में धर्म के बारे में बहुत सी अच्छी अच्छी बाते बताई गयी है! इसलिए हमको इन सभी पुस्तकों को पढ़कर उनके ज्ञान को अपने अंदर ग्रहण करना चाहिये! 


पुस्तक हम सभी की ऐसी दोस्त है जो हर एक जगह पर और हर एक समय पर हमारे काम में आती है! आज के समय में आपको हर एक के घर में धर्म की किताबे मिल जाएगी! सभी लोग अपने घर में धर्म की किताबे रखते है! क्योकि जब लोग अपने असहाय महसूस करते है तब लोग इन्ही धर्म की किताबो का अध्यन करते है! हम लोग पुस्तको को पढ़कर विज्ञान की शक्ति और उसके उपयोग को भी जान सकते है! आज के समय में आपको हर एक महान वैज्ञानिक की की गयी सभी प्रयोगों की पुस्तक मिल सकती है! यदि हमको विज्ञान की शक्ति को जानना है तो हमको इन ही सभी पुस्तकों का अध्यन करना चाहिये! 


जिस तरह से आपको आज के समय में बढ़िया बढ़िया किताबे मिल जाएगी पढने के लिए ठीक उसी प्रकार कुछ ऐसी भी किताबे है जो हमको एक गलत मार्ग पर लेकर जाती है! ऐसी पुस्तके जो हमको गलत मार्ग पर लेकर जाती है उनको पढने से हम सभी को बचना चाहिये! हमेसा अच्छी और ज्ञानवर्धक पुस्तको को ही पढना चाहिये! मै उम्मीद करता हु की आप भी अच्छी पुस्तको को पढ़कर उसके ज्ञान को अपने अंदर ग्रहण करेगें! 


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