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Essay on Himalaya in Hindi- पर्वतराज हिमालय पर निबंध

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Essay on Himalaya in Hindi- पर्वतराज हिमालय पर निबंध

हेलो दोस्तों आज इस आर्टिकल में हम Essay on Himalaya in Hindi मतलब की  हिमालय पर निबंध को पढेंगे! जिस प्रकार मस्तक का मुकुट प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है ठीक उसी प्रकार पर्वतराज हिमायल भी भारत की मान ,  प्रतिष्ठा तथा गौरव का प्रतीक है! भारत की संस्कृति में Himalaya को देशभूमि मतलब की स्वर्ग माना जाता है! हिमालय पर्वत से हमारे भारत देश को कितना ज्यादा फायदा होगा है इसका आप अंदाजा नहीं लगा सकते है! हिमालय पर्वत के बारे में एक कवि ने एक बहुत ही बढ़िया कविता लिखा है की इस कविता को पढना चाहिये और इसके अर्थ को समझना चाहिये! 

" दिवं हे पार्वती ! प्रार्थयसे वृथा श्रम: पितु: प्रदेशास्तव देश्भुमय: !
ऊपर की कविता से कुछ इस तरह का अर्थ निकलाता है! ये पार्वती !

यदि स्वर्ग की कामना से तुम तपश्या कर रही हो , तो तुम्हारा श्रम बेकार है! क्योकि तुम्हारे पिता हिमालय का प्रदेश ही स्वर्ग है! 

Himalaya की स्थापना आज से नहीं बल्कि हजारो साल पहले से हुई है! हिमालय पर्वत चिरकाल से ही हमारी संकृति की हिफाजत कर रहा है! आज भी हिमालय की गुफाओ में बहुत से योगी और महात्मा अपने तपस्या में लीन है! पूरा भारत  Himalaya पर्वत का लाभ उठाता है! आदिकाल बाल्मीकि , वेद्ब्यास , और कालिदास से लेकर आधुनिक युग के प्रसाद , पन्त , निराला , दिनकर  आदि कवियों ने हिमालय पर्वत की महिमा और अप्रतिम सुन्दरता का पूरी तरह से गुणगान किया है! इसमें कोई शक नहीं है की  Himalaya पर्वत की सुन्दरता का कोई मुकाबला नहीं है! सभी महान कवियों ने हिमालय पर्वत के बारे में अपने अलग अलग विचार कविता के माध्यम से दिया है! सभी कवियों में एक चीज़ ये common है की सभी ने हिमालय पर्वत की सुन्दरता का पूरी तरह से गुणगान किया है! हमारे भारत देश के एक महान कवि रामधानी सिंह दिनकर जी ने हिमालय पर्वत के सुन्दरता के बारे में एक बहुत ही बढ़िया कविता लिखी है! वह कविता कुछ इस तरह सी है! 

मेरे नगपति ! मेरे विशाल ! साकार दिव्य गौरव विराट!
पैरुष के पुंजीभूत ज्वाला ! मेरी जननी के हिम किरीट! 
मेरे भारत के दिव्य भाल ! मेरे नगपति ! मेरे विशाल 
इसकी गौरीशंकर , धौलागिरी , कंचनजंगा , केदारनाथ , आदि तुषार मंडित 
उची चोटियों से कविवर प्रसाद जी को उद्बोधन के लिए बाध्य होना पडा-
हिमाद्री तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती स्वयं प्रभा समुज्ज्वल स्वतंत्रता पुकारती! 

इस बढ़िया कविता को सुनकर भारत में एक नयी चेतना जागृत हुआ! आध्यत्मिक दृष्टिकोण के साथ ही साथ लौकिक  दृष्टिकोण से भी Himalaya हमारे लिए बहुत ही ज्यादा उपयोगी है! हमारी सारी उत्तर सीमा पर यह दुर्लय एवं सशक्त प्रहरी के समान खड़ा है! उत्तर भारत में साइबेरिया की ओर से आने वाली बर्फीली हवा के भारत में प्रवेश पर रोक लगाता है! अगर ऐसा नहीं होता तो हमारा देश भी दुसरे ठंडे देशो की तरह बर्फ से ढका रहता और हम ठन्डे और गर्म जनवायु का आनंद नहीं ले पाते! हिमालय पर्वत दछिण पश्चिम से उठने वाली मानसूनी हवाओ को रोककर भारत में वर्षा कराता है! यदि हिमालय पर्वत नहीं होता तो उत्तर भारत का मैदान एक वीरान रेगिस्तान होता! Himalaya मैदानी प्रदेश गंगा , यमुना सिन्धु   आदि हिमालय से निकलने वाली नदियों का ही अवदान है! 

Himalaya का सांस्कृतिक से भी बहुत महत्व है! इसकी पर्वत श्रेणियों के दर्रो से होकर हमने विदेशो की यात्रा की और जिसे हमने चाहा उसे अपने देश भारत में प्रवेश करने दिया! प्रचीनकाल में भारत के अनेक धर्म प्रचारक इन्ही दर्रो से होकर मध्य एशिया , चीन , जापान आदि देशो में गए थे! तथा वहां सद्कर्म का प्रचार किया! इनसे ही होकर भारतीय संस्कृत एवं अध्यात्म के अध्याय ने भारत में प्रवेश किया था! जब राज्यद्रोहियों ने इन दर्रो के द्वार सिकंदर , गजनी , गोरी एवं बाबर जैसे लुटेरे के लिए खोल दिए! तभी भारत पर अनेक बिपतिया के बादल भी छाय! 

भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता Himalaya की देन है! अति प्राचीन काल में भी हमारे देश में सिन्धु सभ्यता तथा वैदिक सभ्यता जन्मी और विकसित हुई! कालांतर में ये दोनों सभ्यताये एकाएक हो गयी एवं भारतीय सभ्यता के रूप में जाने जानी लगी! इसकी मूल धारा में यदा कदा विदेशी संकृतियां जुडती रही और इसे संपन्न बनाती रही! हिमालय ही वह तपोभूमि है जिसकी गुफाओ में साधना करके भारतीय मनीषियों ने पूरी दुनिया में अध्यात्म और मानवतावादी आदर्श की रचना की! देश के आध्यत्मिक और सांस्कृतिक चेतना के अधिकांश केंद्र आज भी हिमालय की गोद में अथवा इसकी नदियों की तटो पर फल फुल रहे है! भारतीय संस्कृति को आदान प्रदान द्वारा संपन्न बनाने वाली यूनानी एवं इस्लामिक संस्कृतियों को हिमालय ने भारत में आने के लिए प्रवेश पथ दिया! 

भारतीय जनजीवन एवं जन संस्कृति का हिमालय एक सदस्य के जैसा रहा है! वृद्ध पिता की भाति अपनी असख्य संतानों के बैभव एवं उत्कर्ष हेतु यह निरंतर आशीर्वाद की मुद्रा में साधनारत है! उस विराट दैवी ब्यक्तिके समछ नतमस्तक होकर हम भारतीय जन सदैव उसके प्रति आभार ब्यक्त करते हुए अपनी प्रणाजलि समर्पित करते रहते है! 

Himalaya की स्थिथि एवं प्रक्रित भारतीयों के लिए कई तरह से जरुरी है! यह हमारी सांस्कृतिक , राजनीतिक, एवं आर्थिक प्रगति का मूल सूत्र है! हिमालय हमारी विभिन्नताओ में एकता का प्रमुख सूत्रधार है! हम इसके प्रकृतिक वैभव के वास्तविक उपभोगता है! हमारे सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक महत्व के प्रमुख्य छेत्र कश्मीर , सिक्किम , भूटान , हिमाचल प्रदेश , असम, मेघालय , नागालैंड , एवं पश्चिम बंगाल के पर्वतीय अंचल हिमालय के तल प्रदेश में स्थित है! इन छेत्ररो में कई नगर_- मसूरी , नैनीताल , देहरादून , श्रीनगर , शिमला , आदि अपने प्राकृतिक सुन्दरता के कारण देश विदेश के लोगो के लिए आकर्षक का केंद्र है! हिमालय के गोद में हमारे कई तीर्थ स्थल है जैसे- बद्रीनाथ, गंगोत्री , कैलास , हरिद्वार प्रमुख्य है! 

भारत के उत्तरी सीमा पर पूर्व से पश्चिम तक जो लगभग 1500 मील लम्बा तथा 150 मील चौड़ा जगह फैला है हमारे देश के प्रहरी के रूप में यही पर्वतराज हिमालय है! हिमालय की सबसे उची चोटी का नाम "एवरेस्ट है! एवरेस्ट पूरी दुनिया का सबसे ऊचा पर्वत शिखर है! जिसकी उचाई 8848 मीटर है! हमारी राजनीतिक भूलो के कारण कुछ विदेशी एवं बिजतीय लोगो ने हिमालय के कुछ अंशो पर अपना अधिकार जमा लिया है! किन्तु अब हम सतर्क हो गए है! और उन भूलो को दुबारा नहीं दोहराने वाले है! हम हिमालय के है और हिमालय हमारा है! हिमालय की गोद में हसता रोता भारत प्रगति के रस्ते पर बहुत ही तेजी से आगे बड़ा रहा है! इसमें कोई शक नहीं है की हिमालय हम सभी के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा!


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