Essay on Book Fair in Hindi- पुस्तक मेला पर निबंध

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हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में Essay on Book Fair in Hindi मतलब की पुस्तक मेला पर निबंध पढ़ेगें! पुस्तकें मानव की सहचरी टीचर तथा मार्ग दर्शिका है! अवकास के समय इनसे बढ़कर हमारा कोई साथी नहीं होता है! ये हमारा मनोरंजन करती है और जरूरत पड़ने पर ये हमारे मन को भी शांति करती है! एक सच्चे दोस्त की तरह ये भी हमारा साथ कभी भी नहीं छोडती है! अगर हम पुस्तकों को मानव का सच्चा साथी कहे तो इसमें कोई गलत बात नहीं होगा! क्योकि ये बात सत प्रतिशत सही है की पुस्तके ही मानव की सबसे बढ़िया साथी होती है! पुस्तको ने ही अनोखी जग क्रांति की है और इतिहास की धारा मोड़ी है! 

Essay on Book Fair in Hindi- पुस्तक मेला पर निबंध


रास्ट्र की प्रगति का मूल लक्ष्मी के साथ साथ सरस्वती की आराधना में निहित है! ज्ञान की देवी सरस्वती की कृपा का अभाव राष्ट्र को सुख शांति नहीं दे सकता है! यही कारण है की कृषि मेला, शिल्प मेला आदि की भाति पुस्तक मेला भी आयोजित किया जाता है! वैसे को भारत में प्राचीनकाल से मेलो का आयोजन चलता आ रहा है! लेकिन फिर भी ये विशेष प्रकार के मेले मुख्यत आधुनिक युग की देन है! इनको मेला ना कहकर प्रदर्शनी भी कहा जा सकता है! 

पुस्तक मेले शुरुवात में यूरोप के अमरीका जैसे बिकसित देशो में ही होते रहे है! लेकिन दो दशक से ये भारत में भी आयोजित हो रहे है! इन मेलो का स्वरूप कभी आंचलिक , कभी रास्ट्रीय और कभी अंतररास्ट्रीय होता है! इनके आयोजन तथा ब्यवस्था हेतु अर्थ , परिश्रम और कभी कभी कुशलता की जरूरत होती है! पुस्तक मेला एक सप्ताह से लेकर दो सप्ताह तक चलता है! मुख्य रूप से प्रकाशन संघ सरकारी सहायत से इन मेलो का आयोजन एवं संचालन करता है! इन मेलो में ब्यवस्था के अनुसार विभिन्न जगहों , भाषायो  तथा विषयों के देश विदेशी प्रकाशन एवं पुस्तक बिक्रेता अपनी अपनी पुस्तक सजाते है! इस अवसर पर ग्राहकों को पुस्तक के मूल्य पर अच्छी छुट दी जाती है! 


पुस्तक मेले के आयोजन की सबसे जरुरी विशेषता यह होती है की मेला स्थल प्रकाशन , लेखक एवं पाठक की त्रीवेणी बन जाती है! इन मेलो में तीनो का पारस्परिक मिलन होता है! इन्ही मेलो से साहितिक लेखकीय युक्त नीतियों का संकेत प्राप्त होता है! इन्ही समाहरो के माध्यम से पापुलर लेखको एवं प्रकाशको को अभिनंधित  कर समाज उनके प्रति अपने कर्तब्य का निर्बाह करता है! कभी कभी अंतिम एक दो दिन के लिए मेला मीना बाजार का रूप ले लेता है! 


पुस्तक मेले का रास्ट्रीय महत्व है! यहाँ ग्रंथो का अपार भंडार संचित होता है! कई अलभ्य पुस्तके भी बहुत ही आसानी से मिल जाती है! साधारण पाठक पुस्तक मेले के माध्यम से अनेक नई नई पुस्तको से परिचित होते है! किसी बड़ी से बड़ी दुकान अथवा सार्वजनिक पुस्कालय में जिन पुस्तकों के उसे दर्शन नहीं होते है! वह भी पुस्तके मेले में मिल जाती है! कही कहानी , उपन्यास , नाटक , निबंध , आलोचना  काव्य आदि की साहितिक पुस्तके तो कही राजनीतिक, अर्थ नीति , समाज नीति, इतिहास , एवं भूगोल आदि और कही चिकीत्सा, धर्म , आदि बिभिन्न शास्त्रों के बढ़िया से बढ़िया ग्रन्थ देखकर सभी ब्यक्ति की आँखे ख़ुशी के मारे झूम उठती है! 

इस प्रकार के पुस्तक मेले सर्वसाधारण में पुस्तकों के प्रति सहज आकर्षक पैदा करते है! उनमे ज्ञान पिपासा जागते है तथा अध्ययन के प्रति उनमे रुझान पैदा करके उनकी रूचि को और अधिक कर देते है! जिस पुस्तक मेले में देश विदेश के बिभिन्न भाषाओ के ग्रन्थ सुसज्जित किये जाते है! उनमे शामिल होने वाले लोगो का ज्ञान विज्ञान के ब्यापार की सीमा न केवल परिचय प्राप्त होता है अपितु आंचलिक तथा स्थानीय स्कूल संस्थानों को अच्छी पुस्तके खरीदने की सुबिधा भी सहज ही प्राप्त हो जाती है! 


पुस्तक मेले का आयोजन रास्ट्र की परम जरूरत है! यही कारण है की यह अधिकाधिक पापुलर होता जा रहा है! यह मेला हर साल दिसम्बर और जनवरी के महीने में लगता है! मेले बढती भीड़ और पाठको की मांग ने आंचलिक स्तर पर इस प्रदर्शनी को आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया है! जन चेतना को बढ़िया करने के लिए पुस्तक मेले की बहुत जरूरत है! इसमें कोई शक नहीं है की पुस्तक मेले का आने वाला कल बहुत बढ़िया है! 


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