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Guru Nanak History in Hindi | गुरु नानक देव का इतिहास



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हेलो दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में Guru Nanak History in Hindi मतलब की गुरु नानक देव के इतिहास के बारे में पढेंगे! इस बात में कोई शक नहीं है की अध्यात्म और स्वाध्याय की परम्परा पूरी दुनिया में मौजूद रही है! लेकिन इस बात को भी दुनिया मानती है की भारत को अध्यात्म एरिया का गुरु माना जाता है! कहा जाता है की अध्यात्म एरिया की शुरुवात भारत से ही हुई थी! प्राचीनकाल से ही भारत एक धर्म प्रचार देश रहा है! और भारत में बहुत ही तरह के धर्म और जाति के लोग रहते है! 

Guru Nanak History in Hindi | गुरु नानक देव का इतिहास

भारत देश के धर्म गुरुओ ने मानव मात्र को उनके कल्यान के लिए उनको अध्यात्मिक सन्देश दिया है! जिसके द्वारा आगे चलकर उन मानव का जीवन आसान हो गया! इतिहास भी इस बात को मनाता है की जब जब मानव अज्ञान में भटककर पाखंड के अंधकार की ओर बढ़ने लगता है! तब तब कोई ज्ञानी पुरुष अपने ज्ञान के प्रकाश से उनको राह दिखाने के लिए इस दुनिया में जन्म लेता है! ये परम्परा आज से नहीं चली आ रही है! बल्कि ये परम्परा बरसो पुरानी है! और हजारो साल से ये परम्परा चली आ रही रही! इसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए भारत के इस पावन धरती पर गुरु नानक देव का जन्म हुआ! गुरु नानक देव एक बहुत ही महान ज्ञानी पुरुष थे! गुरु नानक देव के अपने ज्ञान की ज्योति से लोगो को सही मार्ग पर चलने के लिए राह दिखाया! 

गुरु नानक देव ने मानव को शांति और सत्य की राह दिखाने के लिए जिस मानव संघटन का सूत्रपात किया उसको शुरुवात में लोग " नानक पंथ " के नाम से जानने लगे!  नानक पंथ शुरुवात में सिक्ख धर्म  और खालसा पंथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ! अगर गुरु नानक देव की बात की जाये तो गुरु नानक देव मध्य युग के धर्म धुरंधर , क्रन्तिकारी  सुधारक , महान युग निर्माता , पक्के देश भक्त , दीन दुखियों के हितैषी तथा दूरदर्शी राष्ट निर्माता के रूप में जाने जाते है! गुरु नानक देव की सन्देश इतने अच्छे होते थे की उनको सुनने वाला अपने आप में दुसरे जगह पर खो जाता था! उनके सन्देश लोगो को सही मार्ग दिखाते थे! एक तरह से गुरु नानक देव लोगो को बुरे मार्ग से सही मार्ग में लाने में अपना पूरा योगदान देते थे! जिसके द्वारा काफी लोगो इससे मदद मिलती थी! 

एक समय था 

जब भारत में धर्म ने नाम पर पाखंड का बोलबाल था! जब  भारत में धर्म ने नाम पर पाखंड का बोलबाल था! उस समय गुरु नानक देव का जन्म 1469 में कार्तिक पूर्णिमा को लाहौर से 15 कोस दूर तलबंडी नामक ग्राम में हुआ था! उस ग्राम को लोग ननकाना साहब कहते है! आज के समय में ये जगह पाकिस्तान में है! गुरु नानक देव के पिता का नाम कालू चन्द वेदी था! गुरु नानक देव के पिता कालू चन्द वेदी तलबंडी के राजपूत शासक के कारिंदे थे!  गुरु नानक देव की बड़ी बहन का जन्म उनके नाना के घर हुआ था!  गुरु नानक देव की बड़ी बहन का जन्म उनके नाना के घर होने के कारण गुरु नानक देव को लोग नानकी कहकर बुलाते थे! गुरु नानक देव को उनके नाम के अनुसार उनको लोग नानक कहकर बुलाने लगे!  गुरु नानक देव इसी नाम से सिक्ख समप्रदा के गुरु भी बने! और नानक नाम से उनको पूरी दुनिया के लोग जानने लगे! और नानक नाम से ही उनकी पूरी दुनिया में पहचान बन गयी! 


गुरु नानक देव बचपन से ही बहुत प्रतिभावान थे! और उनके अंदर बिलक्षण ब्यक्ति का गुण बचपन से ही दिखाई देने लगा था! गुरु नानक देव बचपन से ही साधुओ की तरह बैठते थे! और इसके साथ साथ गुरु नानक देव बचपन से ही साधुओ की तरह बात भी करते थे! गुरु नानक देव को अकेले रहना बहुत पसंद था! और वह अपना बहुत ज्यादा समय अकेले गुजरते थे! गुरु नानक देव अक्सर एकांत में जाकर ध्यानमग्न हो जाते थे! जब गुरु नानक देव 8 साल के थे तब उनको पढने के लिए पाठशाला भेजा गया था! लेकिन गुरु नानक देव का पढने लिखने में थोडा भी मन नहीं लगता था! गुरु नानक देव का मन मानव कल्याण की उची बातो में ही लगता था! गुरु नानक देव हमेसा सत्य और धर्म की खोज में रहते थे! और गुरु नानक देव  सत्य और धर्म को ही अपना असली अध्यन मनाते थे! 


गुरु नानक देव के पिता हमेशा यही चाहते थे की गुरु नानक देव पारिवारिक जिम्मेदारियों में उनका साथ निभाये! जब गुरु नानक देव बड़े हो गए तब उनके पिता ने उनका विवाह कर दिया था! गुरु नानक देव के पिता चाहते थे की गुरु नानक देव किसी भी तरह से घर के काम में अपना योगदान दे! लेकिन गुरु नानक देव की सोच इससे बिलकुल अलग थी! गुरु नानक देव के पिता ने इनको खेती की देख भाल करने के लिए कहा लेकिन इसमें उनका मन नहीं लगा जिस कारण वह इस काम को छोड़ दिए! इसके बात गुरु नानक देव के पिता ने किसी तरह उनको नौकरी पर लगाना चाहा लेकिन गुरु नानक देव ने नौकरी करने से इंकार कर दिया! उसके बाद गुरु नानक देव के पिता ने सोच क्यो ना गुरु नानक देव को व्यापार के काम में लगाया जाये! एक दिन गुरु नानक देव के पिता ने गुरु नानक देव को 40 रूपए देकर लाहौर भेजा और उन पैसो से कोई खरा सौदा करने के लिए कहा! 


जब गुरु नानक देव लाहौर के लिए निकले तो रास्ते में उनको साधुवो की एक टोली जाती हुई दिखाई दिया! उन टोली के सभी साधु बहुत भूखे थे! गुरु नानक देव ने सोचा की पिता जी ने खरा सौदा लाने के लिए कहा है! और भूखे को भोजन कराने से बढ़िया खरा सौदा और क्या हो सकता है! इसीलिए गुरु नानक देव ने पिता जी के द्वारा दिए गए सभी पैसे को साधुओ को भोजन कराने में खर्च कर दिए! पैसे खर्च करने के बाद पुनः घर के लिए वापस चल दिए! ये घटना इस चीज़ को दिखाती है की गुरु नानक देव का जन्म इस पृथ्बी पर किसी विशेष प्रयोजन से हुआ है! उनके लिए धर्म और अध्यात्म का मार्ग ही परम सत्य का मार्ग था! गुरु नानक देव उसी राह का अनुसरण भी करते रहे! 


गुरु नानक देव के पिता के द्वारा किये गए अनेक प्रयासों के बाद भी गुरु नानक देव के ब्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया! गुरु नानक देव का मन घर के काम में थोडा भी नहीं लगता था! साधु संत का साथ उनको बहुत अच्छा लगता था! गुरु नानक देव कई कई दिन तक साधु संत के साथ रहते थे! और कई कई दिन तक घर नहीं आते थे! एक दिन गुरु नानक देव ने पूरी तरह से अपने घर को त्याग दिया! और पूरी तरह से सत्संग में जुट गए! गुरु नानक देव अलग अलग जगह पर जाते रहते थे! जो भी ब्यक्ति उनके गहरे संपर्क में आता था वह उनका सिष्य बन जाता था! गुरु नानक देव के पिता ने गुरु नानक देव को समझकर लाने के लिए एक मरदाना नामक गबैये को भेजा! उस समय भजन करने के लिए गुरु नानक देव को एक  गबैये की जरुरत थी! जब मरदाना  गुरु नानक देव के संपर्क में आया तब वह उनका शिष्य बन गया! और वह खुद भी कभी वापस नही आया! 


गुरु नानक देव के समय में यातायात के साधन आज की तरह नहीं थे! उन दिनों लम्बी यात्रा करना बहुत कठिन होता था! गुरु नानक देव का मन दूर स्थानों के दीन दुखियों के दुःख दूर करने के लिए लालायित रहता था! गुरु नानक देव साधारण लोगो के बीच में जाकर मानव कल्याण की बाते करते थे! इसलिए वह ज्ञान के प्रचार के लिए लम्बी यात्रा पर निकल पड़े! गुरु नानक देव ने पुरे भारत में अपने ज्ञान का प्रचार किया! भारत के साथ साथ गुरु नानक देव ने बलूचिस्तान , मक्का , मदीना  और बगदाद जैसे दुसरे देशो में भी यात्रा किया! इन यात्राओ में उनके संपर्क में आने वाले लोग हर धर्म , हर वर्ग , हर जाति  के थे! उनके संपर्क में आने वाले बिभिन्न लोग उनके शिष्य बन गए! 


गुरु नानक देव की मान्यता थी की भगवान एक है वह सबसे अंतकारण में बिद्य्वान है! इसलिए उनके दर्शन अपने दिल में ही हो सकती है! भगवान को बाहर खोजना मतलब की अपना समय बर्बाद करना है! तीर्थ , ब्रत, रोजा , नमाज , चन्दन , तिलक , और माला आदि सब बाहरी साधन है! इनके द्वरा हम भगवान तक कभी नहीं पहुच सकते है! केवल आध्यात्मिक साधना के द्वारा ही मानव अपने दिल में भगवान का दर्शन कर सकता है! गुरु नानक देव उनका इस काम को करने निपुर थे! सत्य अहिंसा , मित्रता , भाईचारा , और ईमानदारी से ही हम उस मार्ग की तरफ बढ़ सकते है! 


गुरु नानक देव कहते थे की अपने दिल से अभिमान निकाल दो! और अपने दिल को पूरी तरह से साफ़ बना लो! छल, कपट , झूट , फरेब ,बेईमानी , धोखा आदि अवगुणों को त्याग दो! यही गुरु नानक देव के उपदेश है! इन्ही चीजों पर सिक्ख धर्म टिका है! गुरु नानक देव महान मानवतावादी थे! उनका मनाना था की पीड़ित मानव की सेवा करना ही इश्वर की सच्ची आराधन है! 


गुरु नानक देव जीवन के अंतिम दिनों में करतारपुर में रहने लगे थे! गुरु नानक देव ने अपने जीवनकाल में ही अपने सबसे प्रिय शिष्य को गुरु अंगद के नाम से अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया था! 1539 में लगभग 70 वर्ष की आयु में नानक जी ने अपना चोला त्याग दिया! लेकिन उनके अमर सन्देश और आदर्श आज भी हमारा मार्गदर्शन कर रहे है! गुरु नानक देव ने इश्वर प्राप्ति का जो मार्ग दिखाया वह आज के युग की जरूरत भी है! आज का मानव स्वार्थ , लोभ , मोह और शत्रुता की भावना से ज्यादा ग्रस्त है! इसलिए गुरु नानक देव की विचार आज के लिए बहुत जरुरी है! मै उम्मीद करता हूँ की हम भी गुरु नानक देव के द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलकर एक बढ़िया दुनिया बनाने में अपना योगदान देंगें!                                                                                              


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