Saddam

Chandra Shekhar Azad Biography in Hindi - चंद्रशेखर आजाद का जीवन परिचय


Chandra Shekhar Azad Biography in Hindi


नाम- पंडित चन्दशेखर तिवारी 
जन्म- 27 जुलाई 1906 
जन्मस्थान- डाबरा मध्य प्रदेश, इंडिया 
पिता का नाम- पंडित सीताराम तिवारी 
उपनाम- आजाद(Azad ), पंडित जी, बलराम, क्विक सिल्वर, 
मरने का स्थान - अल्फ्रेड  पार्क, उत्तर प्रदेश

Chandra Shekhar Azad Biography in Hindi - चंद्रशेखर आजाद का जीवन परिचय

हेल्लो दोस्तों नमस्कार आज हम Chandra Shekhar Azad Biography in Hindi मतलब की चंद्रशेखर आजाद का जीवन परिचय के बारे में इस post में पढेगे! इसके साथ साथ हम life history of chandrashekhar azad मतलब की चंद्रशेखर आजाद की पूरी जीवन के इतिहास के बारे में भी जानेगे!


अगर एक इंडियन होकर भी यदि Chandra Shekhar Azad  के बारे में ना जाने तो हमको अपने आप को इंडियन कहने का कोई हक़ नहीं है! क्योकि Chandra Shekhar Azad  जैसे आंदोलकारियों की वजह से आज हम चैन की सास लेते है! और अपने आप को स्वतंत्र महसूस करते है! Chandra Shekhar Azad  एक ऐसे महान भारत के लाल है! जिसने भारत की आजादी के खातिर अपने ही बन्दुक से अपने आप को गोली मार ले थी! 


चन्दशेखर आजाद(Chandra Shekhar Azad) का जन्म २७ जुलाई 1906 को डाबरा मध्य प्रदेश में हुआ था! इनके पिता का नाम  पंडित सीताराम तिवारी और माता का नाम जगरानी देवी था! Bhagat Singh की ही तरह  चन्दशेखर आजाद भी भारत के एक प्रबल स्वतंत्रता सेनानी थे! जब 1922 में गाँधी जी ने असहयोग आंदोलन बंद कर दिया तो इस आंदोलन के बंद होने के बाद  चन्दशेखर आजाद की पूरी बिचारधारा ही बदल गयी और उसके बाद  चन्दशेखर आजाद ने भारत को पूरी तरह से  स्वतंत्रता दिलाने में जुट गए! चन्दशेखर आजाद भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए कुछ ना कुछ नया करने की कोशिश करने लगे! इसी  बीच वह हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसियन के सदस्य बन गए!  उस समय  हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसियन आये दिन अंग्रेजो के खिलाब कुछ न कुछ कांड करती रहती थी!  


हिन्दुस्तान रिपब्लिक एसोसियन के मध्यम से चंदशेखर आजाद, रामप्रताप बिस्मिल और उनके कुछ साथियो ने मिल कर बहुत बढ़ा कांड कर डाला जो इतिहास में काकोरी कांड के नाम से जाना जाता है! इस कांड के बाद  चंदशेखर आजाद, रामप्रताप बिस्मिल और उनके साथियो को  पुलिस चप्पे -चप्पे  पर ढूढ़ने लगी! इसके अलावा भी और भी बहुत से कांड चंदशेखर आजाद ने किया था जैसे- जब अंग्रेजो ने लाठीचार्ज पर लाला लाजपत  राय पर लाठियों की बारिश कर दी थी! जिसके कारन उनकी मौत हो गयी थी और जिसका चन्द्रशेखर के ऊपर  बहुत बुरा असर पड़ा और चंदशेखर आजाद ने भगत सिंह के साथ मिल कर लाला लाजपत राय के कातिल को मौत के घात उतार दिया और उसके बाद दिल्ली जा कर असेम्बली पर बम  फेक दिया! इन सभी घटना  के बाद अंग्रेजो के अंदर एक तरह का भय पैदा हो गया और अंग्रेज उनको हर एक जगह पर तलासने लगे! 

चन्दशेखर आजाद ( Chandra Shekhar Azad) कैसे स्वतंत्रता आंदोलन में कूदे-

जब 1921 में पंजाब के अमृतसर में जलियाँवाला बाग़ वाला कांड हुआ तो इस कांड से पुरे देश में खलबली मच गई! और पुरे देश के युवा वर्ग के अंदर  चिंगारी की लहर जाग उठी! इसी बीच जब गांधी जी ने १९२१ में असहयोग आंदोलन चलाने का निर्णय किया! तो ये चिंगारी आग में बदल गयी! और वह  पुरे देश में तेज़ी से फ़ैलाने लगा!  असहयोग आंदोलन में सभी युवा भी सड़कों पर उतर कर अंग्रेजो का बिरोध करने लगे! सभी युवा के भाति  चन्दशेखर आजाद भी अपने स्कूल के छात्रों को लेकर सड़क पर उतर आये और अंग्रेजो का विरोध करने लगे! 

अंग्रेजो का विरोध करने के कारण  चन्दशेखर आजाद पहली बाद जेल गए! जेल जाने के बाद अंग्रेज सरकार ने उनको १० कोडे की सजा सुनाई! और चन्दशेखर आजाद को एक खुले मैदान  में लेकर गए और उनके सारे कपडे को उतार कर उनको एक खम्बे से बांध दिया! और उनको कोडे मरना सुरु कर दिया! कहा जाता है की चन्दशेखर आजाद के ऊपर पढ़ने वाले हर के कोडे पर वह "भारत माता की जय" कह कर चिल्लाते थे! 

एक 15-16 साल का लड़का जिस पर पढ़ने वाले हर एक कोडे से उसकी चमड़ी उधड़ जाती  थी! तब भी वह भारत माता की जय कह कर चिल्लाता था! चन्दशेखर आजाद तब तक भारत माता की जय का नारा लगाते रहे जब तक की वह बेहोसे ना हो गया! 


" एक 15 साल के बच्चे के अंदर देशप्रेम की इस भावना को मै सच्चे  दिल से सलाम करता हु"

चन्दशेखर आजाद ( Chandra Shekhar Azad) का बलिदान-

असेम्बली बम कांड में भगत सिंह, राजगुरु, और सुखदेव को दोषी पाया गया और उनको  फासी की सजा सुनाई गयी! इस बाद से  चन्दशेखर आजाद बहुत ज्यादा दुखी हुए! चन्दशेखर आजाद अपने तीनो  मित्रो की सजा कम करने की बहुत कोशिश किया! चन्दशेखर आजाद तीनो की फसी की सजा कम  करने के लिए नेहरु जी से मिले और चन्दशेखर आजाद ने नेहरु से कहा की आप अंग्रेजो पर जोर डाले की इनके फसी की सजा उम्रकैद में कर दिया जाये!  लेकिन पंडित नहरू ने इस बाद से सीधा इंकार कर दिया! इस बात को लेकर दोनों में बहुत ज्यादा बहस हुई! इससे  पंडित नहरू को बहुत गुस्सा आया और वह  चन्दशेखर आजाद को वहा  से तत्काल जाने के लिए बोले दिया! चन्दशेखर आजाद को इस पर बहुत गुस्सा आया और वह अपने साइकिल पर बैठ कर अल्फ्रेड पार्क की तरह चल  दिए! 

अल्फ्रेड पार्क में जा कर वह अपने एक दोस्त सुखदेव राज से इसी बारे में बात करने लगे! तभी वहा  पर ब्रिटिश सरकार का एक वरिस्ट अधिकारी पुलिस की एक सेना के साथ आ  आया गया! और पुरे पार्क को चारो तरफ से घेर  लिया! पुलिस और चन्दशेखर आजाद के बीच भयकर गोलीबारी हुई! तभी चन्दशेखर आजाद की सभी गोलिया ख़तम हो गयी! और उनके पास सिर्फ एक ही गोली बची! चन्दशेखर आजाद अंग्रेजो की गोली से  मरने से अच्छा अपनी गोली से मरने का फैसला किया! और चन्दशेखर आजाद अपने बच्चे हुए १ गोली से खुद ही गोली मार ली! ये घटना २७ फ़रवरी 1931 के  दिन घटित हुई थी! जिस दिन को हम हमेशा याद रखेंगे! 


जिस पेड़  के निचे आजाद की मौत हुई थी लोग उसकी पूजा करने लगे! चन्दशेखर आजाद की मौत के बाद पुरे देश में एक बिरोध का माहोल बन गया! चन्दशेखर आजाद की मौत के दूसरे दिन उनके सोख में एक  रैली निकली  गयी ! उस रैली में चन्दशेखर आजाद को नमन करने इतना ज्यादा लोग आये जिसकी हम कल्पना नहीं  कर सकते है! 


चन्दशेखर आजाद के द्वारा दिए गए बलिदान को हम कभी नहीं भूल पायेगे! जिस जज्बे  के साथ चन्दशेखर आजाद ने स्वाधीनता आन्दोलन में अपना योगदान दिया! उसके लिया हम उनको हमेशा याद रखेंगे! जब चन्दशेखर आजाद की मौत हुई उनके द्वार शुरु किये गए आंदोलन में हजारो  की संख्या में युवा शामिल हुए! और जिसके फलस्वरूप चन्दशेखर आजाद के मौत के 16बी वर्षगांठ पर भारत को आजाद कर दिया गया! और वह दिन 15 अगस्त 1947 का था! चन्दशेखर आजाद के भारत को आजाद कराने का सपना पूरा हो गया! लेकिन  उनको अपने आजाद भारत को देखने का सुख कभी नहीं मिला


आज भले ही चंद्रशेखर आज़ाद हमारे बीच ना हो लेकिन उनके द्वारा किये गए काम को हम सभी कभी भी नहीं भूल पायेगें! चंद्रशेखर आजाद जिस साहस के साथ भारत के आजादी के लिए अपना योगदान दिया उस योगदान को हम कभी भी नहीं भूल पायेगें! उनके द्वारा दिए गए बलिदान को हम कभी भी नहीं भूल पायेगें! आज हम सभी लोग आजाद है लेकिन हमको ये नहीं पता की ये आजदी कितने बलिदानो के बाद मिली है! अगर हमारे देश में चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकरि नहीं होते तो हमारा देश कभी भी आजाद नहीं हो पाता! आज के समय में चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकरि हर एक युवा के लिए प्रेरणा के स्रोत है! 


 Chandra Shekhar Azad  उस हर एक भारतीय के लिए प्रेरणा है जो आज चैन की सास ले रहा है! चन्दशेखर आजाद के बलिदानो को हमको कभी नहीं भूलना चाहिये! तो चलो दोस्तों आज हम चन्दशेखर आजाद के लिए अच्छे मन  से प्राथना करते है! की उपरवाला उनकी आत्मा को हमेशा शांति दे!


अगर आप  Chandra Shekhar Azad  के बलिदानो को याद रखना चाहते  है! तो Chandra Shekhar Azad Biography in Hindi को हर एक  इंडियन के साथ शेयर करो जो की उनको भूलते जा रहा है! इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगो के साथ शेयर करके  चन्दशेखर आजाद(Chandra Shekhar Azad)  के बलिदानों  को लोगो को  बताये!



मै उम्मीद करता हु की आपको  Chandra Shekhar Azad Biography in Hindi पसंद आया होगा! यदि आपको ये Chandra Shekhar Azad Biography in Hindi Language पसंद आया है तो इसको अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर करना ना भूले!

प्रिय मित्रो यदि आपके पास भी  Chandra Shekhar Azad Biography in Hindi से related कोई इनफार्मेशन हो तो आप उस  इनफार्मेशन को मेरे पर्सनल ईमेल  saddamhusen907@gmail पर भेज सकते है!. हम आपके उस इनफार्मेशन को आपके नाम और फोटो के साथ अपने वेबसाइट पर प्रकाशित करेंगे!


आपके पास Chandra Shekhar Azad Biography in Hindi में और Information हैं, या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो तुरंत हमें email करके बताये हम इसको update करते रहेंगे! अगर आपको Chandra Shekhar Azad Biography in Hindi अच्छा लगे तो इसको  facebook पर share कीजिये.