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Essay On Nari Shakti in Hindi- नारी शक्ति पर हिंदी निबंध



Essay On Nari Shakti in Hindi


Essay On Nari Shakti in Hindi,- नारी शक्ति पर हिंदी निबंध-

नमस्कार दोस्तों आज हम आपके essay on nari shakti in hindi, मतलब की नारी की शक्ति पर hindi essay लेकर आये है! इस hindi essay में हम essay on nari siksha in hindi के बारे में भी बात करेगे! भारत में नारी (nari) का स्थान हमेसा से एक बहुत ही गंभीर विषय रहा है! भारत में आज भी नारी को केवल एक घर पर काम करने वाली महिला के रूप में देखा जाता है! भारत का इतिहास साक्षी है की भारतीयों ने नारी (nari) जाति को हमेसा एक बहुत ही अच्छा स्थान प्रदान किया है! वैदिक युग में नारी को बहुत ही उच्च स्थान पर रखा जाता था! भारत के वेद और पुराणों में नारी को परमेश्वर के शक्ति के रूप में स्थान दिया गया है! विद्या, बिभूति, और शक्ति को सरस्वती , लक्ष्मी और दुर्गा के रूप में हम इनका पूजन आज भी करते है! 

प्राचीन युग के बहुत समय पहले परिवार माता के नाम से जाना जाता था और उस समय परिवार का मुखिया पिता नहीं बल्कि माता हुआ करती थी! लेकिन जैसे जैसे समय गुजरता गया और धीरे धीरे नियम भी बदल गया और आज के समय में घर का मुखिया एक आदमी होता है! लेकिन हम ये भी कह सकते है! नारी को लोग आज भी पूजते है! आज से 3 हजार साल पहले बैदिक युग में महिला को उच्च सामाजिक अधिकार प्राप्त थे! उस समय में उनको बैदिक मंत्रो को पढने के साथ साथ वेद मंत्रो की रचना करने का भी अधिकार था! इसलिए आज हम बात को मान सकते है! की कोई भी धार्मिक कार्य एक महिला के बिना नहीं पूरा हो सकता है! पुराने जबाने में महिला घर का काम करने के साथ साथ राज्य प्रबंध का भी काम करती थी! और कभी कभी युद्ध के मैदान में भी पुरुषो का साथ देती थी! 


समय के साथ साथ परिस्थितिया और सामाजिक परिवेश भी बदलता गया! इसके साथ साथ आचार विचार में भी परिवर्तन होते रहे! देश में अनेक सामाजिक, धार्मिक, और राजनैतिक क्रांति हुई! इसलिए प्राचीन जबाने के नियम धीरे धीरे बदलते गए और नये नये नियम बनते गए! और इसका ये फर्क हुआ की मध्य युग आते आते महिला की सामजिक स्थिथि में बहुत ही कमी आ गयी! आदर के नाम पर नारी केवल मनोरंजन का वस्तु बन कर रह गई! जब भारत पर विदेशी यवनों ने हमला करके अपने राज्य की स्थापना की उसके बाद देश की सभ्यता पर संकृत पर बहुत ही गहरा प्रभाव पढ़ा! और उसके बाद जब भारत में मुस्लिमो में अपना सासन स्थापित किया उसके बाद  नारी (nari) जाति का आधा पतन हो गया! और उनकी आजादी घर के दीवारों तक ही रह गयी! साहित्य और समाज में वह मनोरंजन का साधन और घर में दासी बन कर रह गई! विचार कितने बदल गए उसके लिया कबीरदास का एक दोहा प्रयाप्त है!


नारी की झाई पड़त, अँधा होत भुजंग 

कबिरा तिनकी कोन गति, जो नित नारी के संघ 

बदलते जबाने के साथ साथ नारी को हर एक छेत्र में आघात लगा! और इसके कारण पर्दा प्रथा और बाल विवाह का प्रचलन शुरु हो गया! और एक कन्या को पढाना अनावश्यक समझा जाने लगा! और सामजिक कार्यो में नारी का प्रवेश बंद हो गया! इस प्रकार नारी शक्ति का प्रतीक ना हो कर एक अबला नारी बन कर रह गई! नारी की इस प्रकार की स्थिथि के लिए कवि मैथली शरण गुप्त ने इन पंक्ति को कहा है!


अबला जीवन हाय, तुमारी यही कहानी 

आचल में है दूध और आखों में है पानी 

लेकिन आधुनिक युग में फिर से नारी के अंदर बदलाव आने लगा! इस युग में नारी पूज्य के पात्र रहे या ना रहे लेकिन वह आज पुरुष के बराबरी की हर एक काम कर रही है! हलाकि अभी पूरी तरह से सभी नारिया ऐसा काम नहीं कर रही है लेकिन एक बात तो तय है! नारी के स्थिथि पहले के मुकाबले अब सुधार रही है! पुनर्जागरण काल में समाज सुधारक और विचारको के नारी की दुर्दशा पर भी ध्यान दिया!


 स्वामी दयानन्द सरस्वती, राजा राममोहन राय, इश्वरचन्द विद्यासागर, और महात्मा गाँधी जैसे और भी महापुरशो ने जिस संस्कृत को जन्म दिया उससे नारी मुक्त आन्दोलन की एक लहर फ़ैल गई! और इसके असर इस बात से हुआ की अंग्रेजो को भी बाध्य हो कर सति प्रथा जैसे कानूनों पर रोक लगाना पढ़ा! और उसके बाद धीरे धीरे नारी को अधिकार मिलने लगा! बाल विवाह, अनमेल विवाह, पर्दा प्रथा, आदि जैसी चीज़े अब कमजोर पढने लगी! और बिधवा विवाह जैसी चीजों पर कार्य जोर देने लगा! सभी विचारक अपने अपने तरीके से नारी मुक्त आन्दोलन में अपना योगदान दिया! और उसके बाद नारी को सामाजिक अधिकार दिए जाने लगे! और लोगो को नारी के उपयोगिता के बारे में पता चलने लगा! और इसी के साथ साहित्य में नारी जागरण का सन्देश गुज उठा!



भारत के स्वतंत्रता संग्राम में झासी की रानी लक्ष्मीबाई  से लेकर कस्तूरबा गाँधी, सरोजनी नायडूकमला नेहरु आदि ने पुरष के साथ कन्धा से कन्धा मिला कर काम किया! और बहुत सारी मुसीबत को भी साहा! नेताजी सुभाष चन्द बोस के साथ बन्दुक धारण करने वाली आजाद हिन्द सेना के नारी सैनिको का साहस को भुलाया नहीं जा सकता है! 

जब भारत आजाद हुआ उसके बाद नारी राजनीति में भाग लेकर अपनी प्रतिभा का पूरा परिचय दिया! भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी सबसे बढ़िया राजनीतिक महिला थी! नारी ने एकबार भी ये साबित कर दिया की वह अब किसी भी छेत्र में अब अबला नहीं रही! और इसके साथ साथ उसने ये भी साबित कर दिया की वह अब हर आदमी के साथ कंधे से कन्धा मिलकर अंदर और बाहर सभी जगह पर कार्य करने की छमता है! भारतीय संबिधान में भारत की महिला को आदमियों के भाति समान अधिकार प्रदान किये गए है! 


इसके अलावा गावों में भी महिला की भागीदारी सुनिश्चित की गई है! इस प्रकार भारतीय नारी(nari) ने अपनी शक्ति(shakti) को पहचान लिया है! और उसको हर एक छेत्र में स्थापित भी कर लिया है!


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