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Short Poems in Hindi | सोच लो, कल क्या बनोगे-


Short Poems in Hindi

नमस्कार दोस्तों आज हम आपके लिए एक ऐसी Short Poems in Hindi लेकर आये है! जिसको पढ़ने के बाद आपको ये प्रेरणा  मिलेगा की आपको जीवन में क्या बनना चाहिये! इस Short Poems in Hindi के लेखक जितेंदर प्रसाद त्रिपाठी है! और  जितेंदर प्रसाद त्रिपाठी ने इस हिंदी कविता को बहुत ही सुन्दर तरीके से प्रस्तुत किया है! लेखक का भाव इस कविता में साफ़ दिखाई देते है! जितेंदर प्रसाद त्रिपाठी बापू इंटर कॉलेज पीपीगंज गोरखपुर उत्तर प्रदेश के संस्कृत विषय के प्रवक्ता  है! 

जितेंदर प्रसाद त्रिपाठी ने हिंदी और संस्कृत विषय में M.A. की डिग्री हासिल की है! जितेंदर प्रसाद त्रिपाठी एक मझे हुए हिंदी कविता (Hindi Kavita) के लेखक है! और वह अपने लेखन कार्ये के लिए पुरे विद्यालय में फेमस है! मैउम्मीद करना हु की जितेंदर प्रसाद त्रिपाठी द्वारा लिखी गयी ये Short Poems in Hindi  आपको जरूर पसंद आएगी! और आप इस Hindi Kavita को पढ़ने के बाद अपने जीवन में जरूर कुछ सुधार करेंगे! तो चलो जितेंदर प्रसाद त्रिपाठी की उस हिंदी कविता (Hindi Kavita)  को पढ़ते है! 

Short Poems in Hindi | सोच लो, कल क्या बनोगे?


सोच लो, कल क्या बनोगे?

डॉक्टर, प्रोफेसर, वकील इंजीनियर 
अधिकारी- बाबू या दरबारी!
क्या घर  पर रहोगे? खेतीबारी कर सकोगे,
भैसों का गोबर  फेकोगे, 
भोर होते ही चारपाई छोड़ दोगे,
भैसों को भूसा सानकर खिलाओगे ,
या फिर डॉक्टर  इंजीनियर अधिकारी 
बनकर देश की सेवा करना पसंद करोगे,!

मोटर गाड़ी पर चढ़ना सूंदर बंगलो में रहना 

बहुरंगी फूलो वाले मखमली घास के मैदान में 
सुबह शाम टहलना पसंद करोगे!
डॉक्टर, प्रोफेसर, वकील इंजीनियर 
अधिकारी बनाने  के लिए कितना मेनहत करोगे,
सोच लो कल क्या बनोगे?

तुम्हारे यार दोस्त भी बढ़ते जा रहे है!

अपने सभी दोस्त मस्ती मारते है,
बेफिक्र होकर घूमते है,
कभी पान का बड़ा चबाते हुए
सिगरेट का गस्त लगाते हुए 
गुटका चबाते हुए ,

हां-हां, खी-खी करते है! 

कोई कॉलेज का नेता बना है,
हाथ उठाकर इंकलाब करता है,
तुम बन्दर सा उछल पड़ते हो,
सड़क पर उतर पडते हो,
और मोटर गाड़ियों 
पर पत्थर मारते हो,
जिससे जन धन और 
देश की संपत्ति की नुकसान होती है!
हम समझ नहीं पाते ऐसा तुम क्यों करते हो,

वह अपना जेब भरता है,

और तुमको बर्बादी के 
कगार पर खड़ा करता है,
क्या ऐसी यार दोस्त का साथ दोगे ,
अगर ऐसा करते हो तो,
सोच लोग तुम कल क्या बनोगे,
आज सुनहरे समय को 
बहकावे में आकर ब्यर्थ खो दे रहे हो,
यार दोस्तों के पीछे 
जिन्दगी धो  दे रहे हो,

माता, पिता ,टीचर 

सबसे तुम अकड़ कर बोलते हो,
जो तुमरे भले का बात करता है !
उससे ही तुम लड़ जाते हो,
अगर ऐसा करोगे तो सोच लोग 
तुम कल क्या बनोगे,

सही समय है-

कुछ करने का अगर आप नहीं
करोगे तब तुम क्या कर पाओगे,
और जीवन में तुम क्या बन पाओगे 
डॉक्टर, प्रोफेसर, वकील
 इंजीनियर अधिकारी- बाबू  
कुछ भी ना बन पाओगे 
माता पिता के बुढ़ापे का सहारा ना बनोगे,
कपड़े और दवा ना दे सकोगे, 
घरवाली को चटक मटक  साड़ी नहीं दोगे,
बच्चे पापा कह कर आएंगे और अपने मांग पर अड़ जाएंगे,
तुम मुंह निचे करके बैठे रहोगे,
सभी तुमको ताना मारेगे,

अब भी समय है! संभल जाओ 

और अपने जीवन को बनाओ ,
माता पिता और गुरु सबका  
तुम पर भरोसा  है! 
अगर अपने जीवन के प्रति 
आज नहीं सजग होगे 
तो सोच लो तुम,
कल क्या बनोगे!....


यदि आपने ये Hindi Kavita  पूरा पढ़ा होगा तो आपने देखा होगा की लेखक ने अपने विचार को एक Hindi Kavita के माध्यम से कैसे प्रकट किया है! इस short poems in hindi में लेखक ने "कल तुम क्या बनोगे" शीर्षक  का अनुवाद  बहुत ही सरल तरीके से किया है! आपको भी इस  हिंदी कविता (Hindi Kavita) से कुछ प्रेरणा लेना चाहिये और अपने जीवन में आने वाले कल के बारे में सोचना चाहिये! इस short poems in hindi को आपके साथ शेयर करने का हमारा मकसद आपके जीवन के महत्व को बताना था! जीवन बहुत छोटा है इसलिए आज से ही तय कर लो की कल तुम क्या बनोगे!


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